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साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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श्रीसाम्बपुराणम्

प्रसूता विश्वकर्माणं सर्वशिल्पवतां वरम्।
स वै नाम्ना पुनस्त्वष्टा त्रिदशानां स वर्धकिः॥१६॥

उन्होंने सभी शिल्पियों में श्रेष्ठ विश्वकर्मा को जन्म किया। वे पुनः देवताओं के संवर्धक त्वष्टा भी कहे जाते हैं॥१६॥

देवाचार्यस्य तस्यायं दुहिता विश्वकर्मणः।
सरेणुरिति विख्याता त्रिषु लोकेषु भाविनी ॥१७॥

इन देवाचार्य विश्वकर्मा की कन्या सरेणु नाम से प्रख्यात है। ये त्रैलोक्य का उत्पादन करने वाली हैं॥१७॥

राज्ञी संज्ञा च सा स्त्री च प्रभा सैव तु भास्वतः।
तस्या एव सुता छाया निक्षुभा सा महीयसी ॥१८॥

राज्ञी, संज्ञा तथा प्रभा नाम से ख्यात ये सूर्यपत्नी हैं। उनकी कन्या है—छाया, जो पृथ्वीमयी निक्षुभा हैं॥१८॥

विशेष—पुराणों में छाया को सूर्यपत्नी कहा गया है—'छायामार्त्तण्ड सम्भूत'। छाया एवं सूर्यसम्भूत (पुत्र) शनि हैं। परन्तु यहाँ इस श्लोक के अनुसार छाया सूर्यपुत्री हैं। यह संदेहास्पद कथन है। हो सकता है कि यह पाठ की त्रुटि हो। इसका पाठान्तर है—तस्या एषा तु या छाया। विज्ञजन सत्यासत्य का निर्णय स्वयं करें।

सापि भार्या भगवतो मार्तण्डस्य महात्मनः।
साध्वी पतिव्रता देवी रूपयौवनशालिनी।
रन्तुं वै नररूपेण सूर्यो भवति वै पुरा ॥१९॥

वे भी भगवान् मार्तण्ड की भार्या हैं। वे साध्वी, पतिव्रता, रूप-यौवनशालिनी देवी हैं। पूर्व में सूर्य से रमण करने के लिये उन्होंने नररूप धारण किया था॥१९॥

आदित्यस्य तु यद्रूपं महता स्वेन तेजसा।
गात्रेषु प्रतिरुद्धेषु नातिकान्तमिवाभवत् ॥२०॥
अन्विष्यन्नेषु गात्रेषु भगं दृष्ट्वा पिताब्रवीत्।
आर्त्तत्त्वं भव मार्त्तण्ड मार्त्तण्डस्तेन न स्मृतः ॥२१॥

इति साम्बपुराणे राज्ञीनिक्षुभोत्पत्तिर्नाम दशमोऽध्यायः

निज के महान् तेज से आदित्य का जो रूप है, गात्र में प्रतिरुद्ध होकर वह अति कमनीय नहीं है। (उनके शरीर का) गात्र का अन्वेषण करके भग को देखकर (सूर्य को देखकर) पिता ने कहा है—मार्त्तण्ड! तुम आर्त न होओ, अतः उनका नाम मार्त्तण्ड पड़ा॥२०-२१॥

श्री साम्बपुराण में राज्ञी तथा निक्षुभा की उत्पत्ति-नामक दशम अध्याय समाप्त

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