भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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एकादशोऽध्यायः

(सूर्यपुत्राणां विवरणम्)

नारद उवाच
अतः परं प्रवक्ष्यामि प्रजास्तस्य महात्मनः।
त्रीण्यपत्यानि संज्ञायां जनयामास वै रविः॥१॥
द्वौ पुत्रौ तु महाभागौ कन्यां कालिन्दिमेव च।
मनुर्वैवस्वतो ज्येष्ठः श्राद्धदेवः प्रजापतिः॥२॥
ततो यमो यमी चैव यमलौ सम्बभूवतुः।
तेजस्त्वभ्यधिकं तस्य नित्यमेव विवस्वतः॥३॥

नारद कहते हैं—इसके पश्चात् महात्मा सूर्य के सन्तानों का वर्णन करता हूँ। रवि की संज्ञा नामक भार्या से तीन सन्तानें हुईं। महाभाग्यवान दो पुत्र हुये तथा कन्या कालिन्दी का जन्म हुआ। ज्येष्ठ पुत्र वैवस्वत मनु तथा द्वितीय हैं—प्रजापति श्राद्धदेव। तत्पश्चात् यमज (जुड़वा) सन्तान हुई—यम तथा यमी। इस प्रकार इन सूर्य का तेज नित्य अधिक होने लगा॥१-३॥

तेनातितापयामास त्रींल्लोकान् सचराचरान्।
गोलाकारं तु तद्रूपं दृष्ट्वा संज्ञा विवस्वतः।
असहन्ती तु तत्तेजः स्वां छायां प्रेष्य चाब्रवीत्॥४॥

सूर्य का वह तेज तीनों लोकों को तापित करने लगा। सूर्य का वह गोलाकार रूप देखकर संज्ञा उसे सहन न कर सकी। उन्होंने अपनी छाया से कहा॥४॥

संज्ञोवाच
भव नारीस्वरूपा त्वं लक्षणैः सदृशी मम॥५॥
एवमुक्त्वा समुत्तिष्ठत्तस्याः सदृशलक्षणा।
महीमयी तु सा संज्ञा तस्या च्छाया समुत्थिता॥६॥

संज्ञा कहती है—‘तुम मेरे समान नारीरूपा हो जाओ’। तत्पश्चात् संज्ञा पृथिवीमयी होकर छायारूपेण उत्थित हो गयीं॥५-६॥

प्राञ्जलिः प्रणता भूत्वा छाया संज्ञामभाषत॥७॥
यदर्थमहमुत्पन्ना तदाज्ञापय शोभने।
सर्वमेव करिष्यामि यद्यपि स्यात्तु दुष्करम्॥८॥