भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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७२ श्रीसाम्बपुराणम्

त्वं कालः सृष्टिकर्त्ता च हन्ता भर्त्ता प्रभुस्तथा।
सरितः सागराः शैला विद्युदिन्द्रधनूंषि च॥१४॥
तुम ही काल तथा सृष्टिकर्त्ता हो। तुम विनाशक, पोषणकारी तथा प्रभु हो। नदी-सागर-पर्वत-विद्युत् तथा इन्द्रधनुष भी तुम्हीं हो॥१४॥

प्रलयः प्रभवश्चैव व्यक्ताव्यक्तः सनातनः।
ईश्वरात् परतो विद्या विद्यायाः परतः शिवः॥१५॥
शिवात् परतरो देवस्त्वमेव परमेश्वरः॥१६॥
प्रलय तथा उत्पत्ति, व्यक्त एवं अव्यक्त, सनातन तुम हो। ईश्वर से विद्या श्रेष्ठ है, विद्या से शिव श्रेष्ठ है एवं शिव से तुम श्रेष्ठ हो। तुम ही परमेश्वर हो॥१५-१६॥

सर्वतः पाणिपादस्त्वं सर्वतोऽक्षिशिरोमुखः।
सर्वतः श्रुतिमांल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति॥१७॥
तुम सर्वभावेन हस्त-पादयुक्त, सर्वतः चक्षु-मस्तक तथा मुख-विशिष्ट (तुम ही सबके हस्तपाद, चक्षु-मस्तक-मुख) हो। सर्वतः कर्म-विशिष्ट हो तथा तुम ही लोक में सबको व्याप्त करके स्थित हो॥१७॥

सहस्त्रांशुः सहस्राक्षः सहस्रचरणेक्षणः।
भूतादिर्भूर्भुवःस्वश्च महः सत्यं तपो जनः॥१८॥
तुम्हारी किरणें हजारों हैं। हजारों मुख, चरण तथा नयन हैं। तुम ही प्राणियों के आदि, भूः (पृथिवी), भुवः (अन्तरिक्ष), स्वः (स्वर्गलोक), महः, सत्य, तप एवं जनलोक भी तुम ही हो॥१८॥

प्रदीप्तं दीपनं दिव्यं सर्वलोकप्रकाशनम्।
दुर्निरीक्ष्यं सुरेन्द्राणां यद्रूपं तस्य ते नमः॥१९॥
प्रदीप्त, उज्ज्वल, दिव्य, सर्वलोक-प्रकाशक, दुर्निरीक्ष्य, देवश्रेष्ठों का जो रूप है, वही तुम्हारा रूप है; तुमको नमस्कार है॥१९॥

सुरसिद्धगणैर्जुष्टं भृग्वत्रिप्लहादिभिः।
स्तुतं परममव्यक्तं यद्रूपं तस्य ते नमः॥२०॥
देवताओं तथा सिद्धों द्वारा प्रीति से सेवित एवं भृगु-अत्रि-पुलह आदि द्वारा स्तुत जो परम अव्यक्त रूप है, वह तुम्हारा ही है; अतः तुमको नमस्कार है॥२०॥

वेद्यं वेदविदां नित्यं सर्वज्ञानसमन्वितम्।
सर्वदेवातिदेवस्य यद्रूपं तस्य ते नमः॥२१॥