भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 81

चतुर्दशोऽध्यायः ७१

तदनन्तर महाभूत द्वारा प्रवर्त्तित होकर अहंकार उत्पन्न होता है। तत्पश्चात् वायु, अग्नि, जल, आकाश तथा भूमि उत्पन्न होता है, तदनन्तर अण्ड उत्पन्न होता है॥६॥

तस्मिंस्त्वण्डे इमे लोकाः सप्त वै सम्प्रतिष्ठिताः।
पृथिवी सप्तभिर्द्वीपैर समुद्रैश्चैव सप्तभिः॥७॥

वह अण्ड इस सप्तलोक में प्रतिष्ठित हुआ। तत्पश्चात् सप्तद्वीप तथा सप्त समुद्र के साथ पृथिवी प्रतिष्ठित हो गई॥७॥

तत्र चावस्थितो ह्यासन्नहं विष्णुर्महेश्वरः।
विमूढास्तमसः सर्वे प्रध्यायन्तीश्वरं परम्॥८॥

वहाँ (मैं (ब्रह्मा), विष्णु तथा महेश्वर अवस्थित थे। हम सब अन्धकार में विमूढ़ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे॥८॥

ततोऽचिन्त्यं महत्तेजः प्रादुर्भूतं तमोनुदम्।
ध्यानयोगेन चास्माभिर्विज्ञातः सविता तदा॥९॥

तदनन्तर अन्धकार-विदारक अचिन्त्य महत् तेज प्रादुर्भूत हो गया। तब ध्यानयोग से हमने जाना कि वे सविता हैं॥९॥

ज्ञात्वा च परमात्मानं सर्व एव पृथक्-पृथक्।
दिव्याभिस्तुतिभिर्देवास्तं स्तोतुमुपचक्रमुः॥१०॥

उन परमात्मा को जानकर हम देवगण ने पृथक्-पृथक् रूप से दिव्य स्तुति से उनकी स्तुति आरम्भ कर दिया॥१०॥

आदिदेवोऽसि देवानामैश्वर्याच्च त्वमीश्वरः।
आदिकर्त्तासि भूतानां देवदेवो दिवाकरः॥११॥

देवों में तुम आदिदेव हो, ऐश्वर्य में तुम ईश्वर हो, तुम प्राणीगण के आदिकर्त्ता एवं देवताओं के देवता दिवाकर हो॥११॥

जीवनं सर्वसत्त्वानां देव-गन्धर्वरक्षसाम्।
मुनिकिन्नरसिद्धानां तथैवोरगपक्षिणाम्॥१२॥

तुम समस्त प्राणीगण, देवता-गन्धर्व तथा किन्नर, राक्षस, सिंह, मुनि, नाग, पक्षीगण के जीवन हो॥१२॥

त्वं ब्रह्मा त्वं महादेवस्त्वं विष्णुस्त्वं जगत्पतिः।
वायुरिन्द्रश्च सोमश्च विवस्वान् अरुणस्तथा॥१३॥

तुम ही ब्रह्मा, महादेव एवं जगत् के पति हो। तुम ही वायु, इन्द्र, सोम, विवस्वान् तथा अरुण हो॥१३॥