भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 90, कुल 424 में से

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पृष्ठ 90

८० श्रीसाम्बपुराणम्

अग्नि ने सूर्य के दाहिने पार्श्व में अवस्थान किया। पिङ्गल वर्ण के कारण उनको पिङ्गल कहा गया। दोनों अश्विनीकुमार सूर्य के दोनों पार्श्व में स्थित हुये। अश्वरूप में उत्पन्न होने के कारण इनको अश्विनद्वय कहा जाता है।।७।।

पूर्वद्वारे स्थितौ तस्य राज्ञस्तोषौ महाबलौ।
कार्त्तिकेयः स्मृतो राज्ञस्तोषश्चापि हरः स्मृतः ॥८॥
राजूदीप्तौ स्मृतो धातुर्नकारः प्रत्ययोऽस्य तु।
सुरसेनापतित्वेन स यस्माद्दीप्यते सदा।
तस्माच्च कार्त्तिकेयस्तु नाम्ना राज्ञ इति स्मृतः ॥९॥

सूर्य के पूर्व द्वार पर महाबलशाली राज्ञ तथा स्तोष ने अवस्थान किया। कार्त्तिकेय राज्ञ नाम से तथा हर स्तोष नाम से अभिहित हैं। राज (राजू) धातु का अर्थ दीप्ति है और प्रत्ययार्थ 'न' इससे युक्त होता है। देवगण के सेनापतिरूप से वे सर्वदा दीप्तिमान रहते हैं।।८-९।।

तुस गतौ स्मृतो धातुस्तस्य सप्रत्ययः स्मृतः।
गच्छत्यतीव यस्माद्वा राज्ञस्तोषो विधीयते ॥१०॥
खरं हि दुरतिक्रान्तं कृत्वा द्वारमवस्थितौ।
पक्षिप्रेताधिपौ नाम्ना स्मृतौ कल्माषपक्षिणौ ॥११॥

तुस धातु का अर्थ है—गति, यह प्रत्ययार्थ 'स' से युक्त है। जो अत्यन्त गमन करते हैं, इस अर्थ में हर को स्तोष नाम से अभिहित किया गया है। यह राज्ञ तथा स्तोष का वर्णन किया गया। खर (मुखविवर) दुरतिक्रमणीय दो जन द्वार पर स्थित हैं। वे पक्षी तथा प्रेतों के अधिपति हैं। इनको कल्माष तथा पक्षी भी कहते हैं।।१०-११।।

वर्णस्य शबलत्वात्तु यतः कल्माष उच्यते।
पक्षोऽस्यास्तीत्यतः पक्षी गरुड़ः परिकीर्त्तितः ॥१२॥

उनमें जिसका वर्ण धवल है, उसे कल्माष कहते हैं। जिसे पंख (पक्ष) हैं, वह पक्षी है। यहाँ गरुड़ को ही पक्षी कहा गया है।।१२।।

स्थितो दक्षिणतस्तस्य जान्दकारः समाठरः।
जान्दकारश्चित्रगुप्तो माठरः काल उच्यते ॥१३॥
यमस्यार्थकरो नित्यं चित्रगुप्तो महामतिः।
कालो जान्द इति प्रोक्तो जान्दकारस्ततस्तु सः ॥१४॥

सूर्य के दक्षिण में जान्दकार तथा माठर रहते हैं। चित्रगुप्त को जान्दकार एवं काल तथा यम को माठर कहा गया है। यम का अर्थ-साधन करते हैं—महामति चित्रगुप्त।