सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंखैर, स्थिति जो भी हो, अगर मोटापे से ग्रस्त लोग अपना स्वास्थ्य और सौन्दर्य वापस लाना चाहते हैं तो उन्हें अविलम्ब संकल्प की मजबूती के साथ कमर कसकर कुछ उपायों पर अमल करने की तैयारी कर ही लेनी चाहिए। अन्यथा भविष्य की देहरी पर मधुमेह, हाई ब्लडप्रेसर, कब्ज, गैस, हृदय रोग, दमा, गठिया आदि अन्याय रोग उनका स्वागत करने को तैयार मिलेंगे, यह जान लें।
वैसे मोटापे से त्रस्त लोग इससे निजात पाने के लिए जाने क्या-क्या करते हैं और कहाँ-कहाँ भटकते हैं, पर ज्यादातर ऐसा ही होता है कि मोटा अन्तिम दम तक साथ नहीं छोड़ता। यह भी गौरतलब है कि मोटापेके इलाज के चक्कर में अक्सर लोग ज्यादा खतरनाक बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। ऐसे में सीधी सी बात यह है कि मोटापा दूर करने का कार्यक्रम बहुत सोच-समझकर बनाएं और मुस्तैदी से उसका पालन करें। दवाओं का सहारा लेने का इरादा हो इतना याद रखें कि एलोपैथी में मोटापा घटाने की अब तक जो भी दवाएं हैं, निरापद कतई नहीं हैं। इन दवाओं से आप ज्यादा बड़ी मुसीबत में फँस सकते हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आयुर्वेद तमाम नुस्खे निरापद और कारगर हो सकते हैं, पर इनमें भी हर किसी नुस्खे का सिर्फ जड़ी-बूटियों के नाम पर ही आँख मूँदकर नहीं आजमाया जा सकता है। पथ्य – अपथ्य का ध्यान रखते हुए होम्योपैथी और बायोकैमी दवाओं से वजन घटाना पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है। कई लोग सोच सकते हैं कि स्वदेशी चिकित्सा की बात करते-करते होम्योपैथी का जिक्र कैसे? तो यहाँ अति संक्षेप में यह बता देना उचित है कि होम्योपैथी के सिद्धान्त और आयुर्वेद की मूल मान्यताओं में कहीं कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि कई मायनों में होम्योपैथी कहीं ज्यादा ‘आयुर्वेदिक पद्धति’ है। यह रहस्य वे लोग आसानी से समझ सकते हैं जिन्हें होम्योपैथी के सैद्धांतिक पक्ष की गहरी समझ है। यह भी आश्चर्यजनक बात है कि जर्मनी में खोजी गई यह पद्धति भारतीय समाज और सांस्कृतिक मूल्यों के सर्वथा अनुकूल है। ऐसी पद्धति की खोज संभवतः इसलिए भी आसान हुई, क्योंकि इसके अविष्कर्ता महात्मा
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