सम्पूर्ण चिकित्सा

सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
DevanagariHindipublished115 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 40
- ● 20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई 5 ग्राम, सोंठ(सूखी अदरक) 10 ग्राम, 10 छोटी पीपर के टुकड़े, सब आपके घर में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इन सब को एक गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बनाना है ठण्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और शाम तीन बार पीना चाहिए।
- ● नीम गिलोई – इसका डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाये, प्लेट-लेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में बहुत ज्यादा काम आता है।
- ● एक और अच्छी दवा है, एक पेड़ होता है उसे हिन्दी में हारसिंगार कहते हैं, संस्कृत में पारिजात कहते हैं बंगला में शिउली कहते हैं, उस पेड़ पर छोटे छोटे सफेद फूल आते हैं, और फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमें खुशबु आती है, रात को फूल खिलते हैं और सुबह जमीन में गिर जाते हैं। इस पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पीस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गर्म करो के पानी आधा हो जाए फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस से बीस साल पुराना गठिया का दर्द इससे ठीक हो जाता है। और यही पत्ते को पीस के गर्म पानी मे डाल के पियो तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दवा से ठीक नहीं होता वो इससे ठीक होता है जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते हैं।
❖ खाँसी
खाँसी तीन प्रकार की होती है, सुखी खाँसी, काली खाँसी और कफ खाँसी। खाँसी आने पर मुहँ से खों- खों की आवाज आती है। सूखी खाँसी में रोगी खाँसने से बेहाल हो जाता है। लेकिन बलगम वाली खाँसी में कफ बाहर निकलता है। यहाँ जो घरेलू नुस्खे दिये जा रहे हैं वह तीनों प्रकार की खाँसी के लिए हैं।
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