भारतकोश
सम्पूर्ण चिकित्सा

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Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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  • • नीम की कोमल पत्तियाँ, काली मिर्च और काला नमक का पाउडर बनाकर प्रतिदिन प्रातः काल सेवन करने से लाभ होता है।
    • • आँवला जलाकर उसमें थोड़ सेंधा नमक मिलाकर सरसों के तेल में रगड़ने से पायरिया दूर होता है।

❖ मुँह के छाले

मुँह के छाले प्रायः पेट की गड़बड़ी से होते हैं। ज्यादा गर्म चीजों को खाने से, अमाशय की गड़बड़ी, रक्त की अशुद्धि आदि से भी होते हैं। ये छाले कभी जीभ की नोक पर तो कभी पूरी जीभ पर निकलते हैं। छाले होने के कारण मुँह में बार-बार पानी आने लगता है। इन छालों में जलन तथा दर्द हो जाता है। होठों पर भी छाले आ जाते हैं।

  • • भोजन के बाद सौफ के पानी से कुल्ला करें। आराम मिलेगा।
  • • सुहागे को थोड़ा सा तवे पर गर्म करके, पानी के साथ ले, तुरन्त लाभ होगा।
  • • दो चम्मच हल्दी का चूर्ण पानी में उबालकर उससे कुल्ला करें।
  • • गाय के दूध में एक चम्मच घी डालकर पीयें।
  • • मेहदी की पत्तियों को चबाने से छाले ठीक होते हैं।

वात रोग

❖ अर्थराइटिस/गठिया/जोड़ों का दर्द

जब हम खड़े होकर पानी पीते हैं, तो पानी के साथ वायु हमारे घुटनों तक पहुँच जाती है, जिससे गठिया बाय का रोग हो जाता है। जब भोजन नहीं पचता तो कच्चा रस इकट्ठा होने लगता है जिस कारण गठिया होने लगती है। ये रोग ज्यादातर आरामदायक जीवन बिताने वालों को होता है,

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