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सम्पूर्ण चिकित्सा

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Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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की कुछ दिनों तक नियमित रूप से रूई के फोहे से मालिश करनी चाहिए।

बाल चकत्तों के रूप में उड़ गए हों, गंज हो या पक रहे हों तो निम्न चिकित्साक्रम अपनाना चाहिए –

  1. 1. इसके 1 घण्टे बाद 3 ग्राम शतावरी चूर्ण 10 ग्राम त्रिफला घृत में मिलाकर दूध के साथ प्रातः तथा इसी तरह सांय सेवन करें।
  2. 2. त्रिफला, काले तिल तथा भृंगराज सभी सम्भाग लेकर चूर्ण बनाकर इसके बराबर पिंसी मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से 10 ग्राम चूर्ण की एक मात्रा भोजन के बाद लें।
  3. 3. सिर में प्रतिदिन सांयकाल सोने से पूर्व भृंगराज तेल की मालिश करें।
  4. 4. यूँ चाय पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। परंतु यदि आप आदतवश चाय पीते ही हैं तो चाय बनाने के बाद चाय की पत्ती का एक अच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं। उबली हुई चाय पत्ती को फेंकने के बजाए इसे पुनः उबालकर छान लें और ठण्डा होने दें। अब इसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं तथा मल-मलकर सुखाएं, फिर धो डालें। इससे बाल साफ और चमकदार होते हैं।
  5. 5. नींबू, संतरे का रस और दही मिलाकर बालों में मलें और पानी से धो दें। यह प्रयोग बालों को सुन्दर और घना बनाने में उपयोगी हैं।
  6. 6. किसी खेत या तालाब में साफ जगह पर खोदकर 1 फुट नीचे की मिट्टी निकालकर रख लें। काली मिट्टी हो तो अति उत्तम। आवश्यकता भर यह मिट्टी पानी में गलाकर कंकड़-पत्थर छानकर साफ घोल बनाएं। इस घोल से नित्य सिर धोने से बाल खिल उठते हैं और घने, लम्बे, मुलायम बने रहते हैं।
  7. 7. दही में नींबू का रस मिलाकर बालों में मलें तथा धूप में सुखाएं। सूखने पर धो दें। इससे बाल हल्के-फुल्के और फूले-फूले से रहेंगे।

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