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सम्पूर्ण चिकित्सा

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Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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जड़ों तक लगाएं और घण्टे भर बाद सूख जाने पर सिर को मुल्लानी मिट्टी या बेसन से धो दें। इस प्रयोग से आपके बाल काफी सुंदर दिखेंगे। बालों में रंग न लाना हो तो कल्या और कॉफी पाउडर का इस्तेमाल न करें। बालों को सुंदर, लंबे, घने और काले बनाए रखने का यह एक अच्छा उपाय है, बशर्ते साबुन का प्रयोग बंद कर दिया जाए।

  • • उचित आहार-विहार के साथ एक चम्मच साबुत काले तिल तथा एक चम्मच भृंगराज पंचांग कपड्डछन चूर्ण करके फॉक लें तथा ऊपर से ताजा पानी पिएं। 6 माह तक निरंतर यह प्रयोग करने से बालों का असमय पकना व झड़ना रुकेगा इस के साथ सायंकाल सोने से पूर्व सूर्यतप्त नीले नारियल तेल की भी मालिश करें तो अच्छा परिणाम मिलेगा।
  • • 200 ग्राम सूखे आँवले, 150 ग्राम शिकाकाई, 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागरमोथा, 40 ग्राम रीठा तथा 40 ग्राम कपूर लेकर सबका महीन कपड्डछन चूर्ण बनाकर रख लें।
  • • इसमें से 50 ग्राम चूर्ण लेकर लगभग 400 ग्राम उबलते पानी में 15-20 मिनट तक भिगोएं। तदन्तर मसल-छानकर इस जल से बालों में जड़ों तक मलें। इस प्रयोग से बाल मजबूत होते हैं, उनका झड़ना रुक जाता है तथा काले, मुलायम बने रहते हैं। इससे लीक-जूँ भी नष्ट होती है।
  • • चमेली के पत्ते, चित्रक के पत्ते, लाल कनेर के पत्ते तथा करंज के पत्ते- प्रत्येक 250-250 ग्राम लेकर जल में पीसकर कल्क बनाएं। अब 4 किलो तिल का तेल लेकर इसमें कल्क मिलाकर 16 किलो पानी डालकर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाने पर छानकर रख लें।

इस तेल की मालिश से सिर या दाढ़ी के, जहाँ भी बाल उड़ गए हों, वहाँ जल्दी ही पुनः उगने लगते हैं। इस तेल

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