भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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शान्ति, संतोष और दया से जीवन सुखमय होता है और लालच आदमी को रोग रूपी अंधे कुएं में धकेल देता है। 'लालच बुरी बला' की कहावत जगत प्रसिद्ध है। स्वार्थी आदमी कभी सुखी नहीं हो सकता। क्रोध और तृष्णा का त्याग कर देना चाहिए। क्रोधो वैवस्वतो राजा तृष्णा वैतरणी नदी। विद्या कामदुधा धेनुः संतोषो नन्दनं वनम्॥ क्रोध यमराज की मूर्ति है, लालच वैतरणी नदी (नरक में बहने वाली नदी) है, विद्या कामधेनु गाय है और संतोष इंद्र के नन्दन वन जैसा सुख देने वाला है॥13॥ क्रोध आदमी को मृत्यु की ओर धकेलता है, लालच अनेक कष्टों को जन्म देता है, विद्या मनोवांछित फल देने वाली है और संतोष से आत्म-सुख मिलता है। गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्। सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥ गुण से रूप की शोभा होती है, शील से कुल की शोभा होती है, सिद्धि से विद्या की शोभा होती है और भोग से धन की शोभा होती है॥14॥ यहां भोग से आशय यह है कि धन का उपयोग जब तक सत्कर्मों में नहीं किया जाता, तब तक धन की शोभा नहीं हो सकती। इसी प्रकार सौंदर्य तभी शोभा पाता है, जब उसे धारण करने वाला गुणी भी हो। विद्या वही शोभित होती है, जो अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ले और आदमी का शील-स्वभाव उसके कुल की शोभा बढ़ाने वाला होता है। 99