भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 196 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 107

बात हुई, न पहले किसी ने इसे बनाया और न कोई प्रकरण ही आया, तब भी आकाश में भ्रमण करने वाले चंद्र और सूर्य के ग्रहण के बारे में जो ब्राह्मण पहले से ही जान लेता है, वह विद्वान क्यों नहीं है? अर्थात् वास्तव में वह विद्वान है, जिसकी गणना से ग्रहों की चाल का सही-सही पता लगाया जाता रहा है॥5॥ आचार्य चाणक्य ने प्रस्तुत श्लोक में उन विद्वानों की विद्वता की प्रशंसा की है जिन्होंने सूर्य-चंद्र की स्थितियों की हमें जानकारी दे रखी है। आकाश में कोई दूत नहीं जा सकता, न ही वहां किसी से कोई वार्तालाप हो सकता है, न पहले से किसी ने कुछ बता ही रखा है और न वहां किसी से संगम हो सकता है, फिर भी जो ब्राह्मण श्रेष्ठ आकाश में स्थित सूर्य और चंद्रमा के ग्रहण को जान लेता है, वह विद्वान क्यों नहीं है? विद्यार्थी सेवकः पान्थः क्षुधाऽऽर्त्तो भयकातरः। भाण्डारी प्रतिहारी च सप्त सुप्तान् प्रबोधयेत् ॥ विद्यार्थी, नौकर, पथिक, भूख से व्याकुल, भय से त्रस्त, भंडारी और द्वारपाल, इन सातों को सोता हुए देखें तो तत्काल जगा देना चाहिए क्योंकि अपने समस्त कर्मों और कर्त्तव्यों का पालन ये जागकर अर्थात सचेत होकर ही करते हैं॥6॥ विद्यार्थी यदि सोयेगा तो पढ़ेगा कैसे ? नौकर यदि सोयेगा तो डांका पड़ सकता है, मुसाफिर यदि सोयेगा तो लुट जाएगा, भूख से व्याकुल व्यक्ति को भोजन करा देना चाहिए। उसे तो वैसे ही नींद न आएगी। भंडारगृह का स्वामी और द्वारपाल सोते रहेंगे तो चोरों को चोरी करने का अवसर मिल सकता है। अतः इन्हें सदैव सावधान रहना चाहिए। 105 CC0. Vasishtha Tripathi Collection Digitized by eGangotri