सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमित्र के गुप्त रहस्यों को कभी प्रकट न करें। इससे केवल शत्रुता ही पैदा होती है। गंधः सुवर्णे फलमिक्षुदंडे, नाऽकारि पुष्पं खलु चंदनस्य। विद्वान धनाढ्यश्च नृपश्चिरायुः, धातुः पुराकोऽपि न बुद्धिदोऽभूत् ॥ ब्रह्मा को शायद कोई बताने वाला नहीं मिला जो कि उन्होंने सोने में सुगंध, ईख में फल, चंदन में फूल, विद्वान को धनी और राजा को चिरंजीवी नहीं बनाया।।3।। यह सृष्टिकर्त्ता की कैसी विडम्बना है कि उसने स्वर्ण में सुगंध नहीं डाली, गन्ने पर फल नहीं लगाया, चंदन के वृक्ष पर फूल नहीं उगाए, विद्वान को धनवान नहीं बनाया और राजा को, जो कि प्रजापालक है, दीर्घजीवी नहीं बनाया। सर्वौषधीनाममृता प्रधाना, सर्वेषु सौख्येष्वशनं प्रधानम्। सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानं, सर्वेषु गात्रेषु शिरः प्रधानम् ॥ सभी औषधियों में अमृत प्रधान है, सभी सुखों में भोजन प्रधान है, सभी इन्द्रियों में नेत्र प्रधान है और सारे शरीर में सिर श्रेष्ठ है।।4।। अमृत से जीवन को अमरता प्राप्त होती है, भोजन से शरीर पुष्ट होता है, तृप्ति प्राप्त होती है, आंखों के बिना सारा संसार ही अंधकार में डूब जाता है और दिमाग के बिना तो चिन्तन ही असंभव है। दूतो न संचरति खे न चलेच्च वार्ता पूर्वं न जल्पितमिदं न च संगमोऽस्ति। व्योम्नि स्थितं रविशशिग्रहणं प्रशस्तं जानाति यो द्विजवरः स कथं न विद्वान् ॥ न तो आकाश में कोई दूत गया, न इस संबंध में किसी से 104 CC0. Vasishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri