सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ अथ दशम अध्याय ॥ धनहीनो न हीनश्च धनिकः स सुनिश्चयः। विद्यारत्नेन यो न हीनः यः स हीनः सर्ववस्तुषु॥ निर्धन व्यक्ति हीन अर्थात छोटा नहीं है, धनवान वही है जो अपने निश्चय पर दृढ़ है, परंतु विद्या रूपी रत्न से जो हीन है, वह सभी चीजों से हीन है।।1।। किसी भी कार्य को सम्पन्न करने के लिए विद्या बहुत जरूरी है। उसी के द्वारा वह धन प्राप्त करता है। विद्या ही सच्चा धन है। दृष्टिपूतं न्यसेत् पादं वस्त्रपूतं पिबेज्जलम्। शास्त्रपूतं वदेद् वाक्यं मनः पूतं समाचरेत्॥ अच्छी तरह देखकर पैर रखना चाहिए, कपड़े से छानकर पानी पीना चाहिए, शास्त्र से (व्याकरण से) शुद्ध करके वचन बोलना चाहिए और मन में विचार करके कार्य करना चाहिए।।2।। देख-भालकर चलने, शुद्ध जल तथा शुद्ध वचनों का प्रयोग करने और मन से भली प्रकार से सोच-समझकर कार्य करने की बात यहां कही गई है। 110 CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri