सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरखता था। इसी बात को ध्यान में रखकर सम्भवतः चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के काल में राजा और प्रजा के मध्य समन्वय का सीधा और सरल मार्ग निश्चित किया था। राजा के सम्मुख आम जनता को महत्त्व देकर और कूटनीति के विविध अंगों का सांगोपांग चित्रण करके चाणक्य ने सम्राट चन्द्रगुप्त के राज्य को एक अत्यन्त मजबूत आधारशिला प्रदान की थी। चाणक्य के नीति वाक्य भले ही शब्द-विन्यास में छोटे हों, पर उनमें जो भाव भरे हैं, वे अत्यन्त विपुल हैं, गहन हैं और दूर तक प्रभावित करने वाले हैं। चाणक्य की नीतियों का सरल भाषा में अनुवाद करने तथा उन्हें आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़ने के पीछे हमारा यही उद्देश्य है कि हम वर्तमान शासन-सत्ता और प्रजा के मध्य एक ऐसे सेतु का निर्माण कर सकें, जिस पर से होकर जनहित और राष्ट्रहित की भावनाएं एक दूसरे की ओर प्रवाहित हों। यदि यह सम्भव हो सका तो हमारा यह प्रयास सार्थक कहलाएगा। —महेन्द्र मित्तल