सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकर प्रकाशित किया है और उनके अर्थ को सटीक बनाने की यथासंभव कोशिश की है। इस अर्थ की सार्थकता के लिए हमने इसे वर्तमान संदर्भों के साथ जोड़ने का भी प्रयास किया है। सरल और सहज भाषा में अर्थ की व्याख्या की गई है और यह भी प्रयास किया है कि पुस्तक केवल उपदेशात्मक बनकर ही न रह जाए। विश्व के इतिहास में ऐसा व्यक्ति आपको ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा, जिसने अपने बुद्धि चातुर्य से राजसत्ता को प्राप्त करने में विजय श्री प्राप्त की हो। राजा और प्रजा के मध्य चाणक्य ने एक ऐसा सेतु स्थापित किया था, जिसकी आधार-शिला ठोस भूमि पर स्थापित है। उनके द्वारा प्रस्तुत नीति वाक्यों और सूत्रों को पढ़कर जन-मानस में एक नया जोश, ओज, तेज, दृढ़ता, साहस, आत्मविश्वास और समाज के पुनः उत्थान की एक ऐसी नवचेतना जाग्रत होती है, जिसकी मिसाल इतिहास में प्राप्त नहीं होती। आचार्य चाणक्य के जीवन का उद्देश्य था—जन कल्याण। इसी उद्देश्य के निमित्त उन्होंने अपने ग्रन्थों की संरचना की थी। उनकी राजनीति सदाचार और धर्म से अलग नहीं थी। आज के संदर्भ में चाणक्य की नीतियां उतनी ही कारगर हैं, जितनी कि चाणक्य के काल में थीं। मनुष्य आज भी वही है, जो तब था। आज उसे जिस तरह की परिस्थितियों के मध्य से गुजरना पड़ रहा है, उस समय भी कमोबेश कुछ ऐसी ही स्थितियों से उसे दो-चार होना पड़ता होगा। आज जिस प्रजातन्त्र के मध्य हम जी रहे हैं, उस समय का राजतन्त्र कुछ ऐसा ही रहा होगा। चाणक्य की नीतियों से तत्कालीन समाज का स्पष्ट चित्रण हमें प्राप्त होता है। आज का प्रजातन्त्र तत्कालीन राजतन्त्र का ही बदला हुआ स्वरूप है। बस आज इतनी छूट अवश्य मिली है कि देश का एक अदना-सा व्यक्ति भी प्रधानमंत्री की आलोचना में मुंह खोल सकता है। तब शायद ऐसा न रहा हो, परंतु अपने ज्ञान की प्रबुद्धता के तेज से चाणक्य जैसा व्यक्ति ही तब भी राजा को स्पष्ट चुनौती देने की क्षमता