भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 196 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 11

था। उनकी प्रत्येक भावनाओं को जांचा-परखा था और जिस प्रकार उन्हें सरलता से कंठस्थ किया जा सके, उसे ध्यान में रखकर मनुष्य की भलाई के लिए, उन्होंने अपने उस चिन्तन को छोटे-छोटे सरल नीति वाक्यों में बांध लिया। महर्षि पातंजलि का योग सूत्र, नारद का भक्ति सूत्र, वात्स्यायन का कामसूत्र, भारत मुनि का नाट्य सूत्र, शुक्राचार्य की शुक्रनीति, कामन्दकीय नीतिसार, धर्मसूत्र, मनुस्मृति, वैदिक साहित्य सूत्र, उपनिषद, पुराण, संस्कृत महाकाव्य, पाणिनि की अष्टाध्यायी, शतपथ ब्राह्मण, रामायण, महाभारत, बौद्ध और जैन साहित्य आदि अति प्राचीन ग्रन्थ हैं, जिनसे सम्पूर्ण धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन की छोटी-से-छोटी बात का उल्लेख प्राप्त होता है। विद्वानों का मत है कि ये ग्रन्थ ईसा के जन्म से सैकड़ों वर्ष पहले लिखे जा चुके थे और चाणक्य के काल से भी काफी पहले इनका प्रचुरता के साथ प्रचलन था। दरअसल इसमें कोई विभेद नहीं है कि हमारी प्राचीन राज्य-व्यवस्था उतनी ही पुरानी है, जितनी कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और हमारा धर्म है। प्राचीन भारतीय साहित्य में राज्य-व्यवस्था को राजधर्म, राजनीति, राज्यशास्त्र, दण्डनीति, नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र आदि नामों से ही जाना जाता रहा है। कौटिल्य ने भी अपने अर्थशास्त्र में अपने से पूर्ववर्ती अर्थशास्त्र के ज्ञाता, उन्नीस आचार्यों के नामों का उल्लेख किया है। इनके रहते हुए भी प्राचीन भारत के राजशास्त्रियों में चाणक्य का स्थान सर्वोपरि है। उन्हें शासन-कला और कूटनीति का महान प्रतिपादक माना जाता है। 'कौटिल्य का अर्थशास्त्र' राजनीति शास्त्र का सबसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। उनके इस ग्रन्थ में उनके नीति वाक्य सरल संस्कृत श्लोकों और सूत्रों के रूप में बिखरे पड़े हैं। आज बाजार में 'चाणक्य नीति' के रूप में कितनी ही पुस्तकें उपलब्ध हैं। उनमें कितने ही श्लोकों की पुनरावृत्ति भी प्राप्त होती है। संस्कृत भाषा का दोष भी काफी मिलता है और जगह-जगह अर्थ का अनर्थ भी किया गया है। इन सभी बातों को देखते हुए हमने चाणक्य द्वारा रचित नीतियों को संग्रहीत