सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऔर उसे नष्ट कर डाला। उसे खत्म करके चाणक्य ने अपने प्रिय शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य को राजसिंहासन पर बैठाया। राजसत्ता प्राप्त करके भी उन्हें राज-मोह कभी नहीं हुआ। राजमहलों से दूर वन में कुटी बनाकर रहने वाला यह आचार्य, चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन को सुदृढ़ करने में निरन्तर लगा रहा। उसने अपने से पूर्ववर्ती चिन्तकों के ग्रन्थों और शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। प्राचीन भारत की शासन-व्यवस्था को बारीकी से समझा तथा परखा, पौराणिक ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित मान्यताओं और नीतियों का आकलन किया, वैदिक साहित्य में वर्णित सामाजिक व्यवस्था के गुण-अवगुण का परिशीलन किया। जिस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास ने 'नाना पुराण निगमागम सम्मत' आदर्शों व व्यवस्थाओं का व्यावहारिक परिशीलन करके महान ग्रन्थ 'रामचरितमानस' की रचना की थी, उसी प्रकार चाणक्य ने अपने पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा स्थापित नीति-सूत्रों का गहन अध्ययन किया और सम्राट चन्द्रगुप्त की शासन-व्यवस्था के लिए दिशा-निर्देश तय किए व इतिहास प्रसिद्ध ग्रन्थ 'अर्थशास्त्र' की रचना की। यह ग्रन्थ 'कौटिल्य अर्थशास्त्र' के नाम से कालजयी रचना के रूप में राजनीति का महाकाव्य सिद्ध हुआ। इसीलिए चाणक्य द्वारा रचित जो नीति श्लोक आज उपलब्ध होते हैं, उनमें अधिकांशतः शुक्र नीति, 'रामायण' में वर्णित राम-राज्य की नीति और 'महाभारत' में नारद, कृष्ण, विदुर, भीष्म आदि के द्वारा जिस प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था और राजा-प्रजा के संबंधों की विस्तृत व्याख्या की गई है, उसका अधिकांश अंश लेकर चाणक्य ने अपने नीति ग्रन्थ की रचना की, परंतु उन्होंने नकल नहीं की, अपितु उनका अनुशीलन करके केवल उन्हें युगानुकूल स्वरूप दिया, बल्कि उनका वर्तमान युग की परिस्थितियों से पूरा-पूरा तालमेल स्थापित किया। प्राचीन काल में, भारतीय चिन्तकों और मनीषियों ने मनुष्य-जीवन की प्रत्येक भंगिमा को बहुत करीब से देखा