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सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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सेनापति थे। आचार्य चाणक्य का समस्त जीवन जन-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत था। वे महान आदर्शवादी, सामाजिक तथा राजनीतिक मर्यादाओं के प्रतिष्ठापक थे। विद्वानों का तो यहां तक मानना है कि जिन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का अध्ययन नहीं किया, वे राजतन्त्र का सफल संचालन ही नहीं कर सकते। आचार्य चाणक्य के जीवन की एक प्रारम्भिक घटना से उनके चरित्र का बहुत सुन्दर खुलासा होता है। एक बार वे अपने शिष्यों के साथ तक्षशिला से मगध आ रहे थे। मगध का राजा महानन्द उनसे द्वेष रखता था। वह एक बार भरी सभा में चाणक्य का अपमान कर चुका था। तभी से उन्होंने संकल्प कर लिया था कि वे मगध के सम्राट महानन्द को पदच्युत करके ही अपनी शिखा में गांठ बांधेंगे। इसके लिए वे अपने सर्वाधिक प्रिय शिष्य चन्द्रगुप्त को तैयार कर रहे थे। मगध पहुंचने के लिए वे सीधे मार्ग से न जाकर एक अन्य उबड़-खाबड़ मार्ग से अपना सफर तय कर रहे थे। उस मार्ग में कांटे बहुत थे। तभी उनके नंगे पैर में एक कांटा चुभ गया। वे क्रोध से भर उठे। तत्काल उन्होंने अपने शिष्यों से कहा—'उखाड़ फेंको इन नागफनों को। एक भी शेष नहीं रहना चाहिए।' उन्होंने तब उन कांटों को ही नहीं उखाड़ा, उन कांटों के वृक्ष की जड़ों में मट्ठा लाकर डाल दिया, ताकि वे दुबारा न उग सकें। इस प्रकार वे अपने शत्रु का समूल नाश करने में ही विश्वास करते थे। वे दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने में विश्वास नहीं करते थे, अपने द्वारा नया मार्ग बनाने में उनका विश्वास था। कहा जाता है कि मगधपति धर्मनन्द ने चाणक्य के पिता चणक का वध किया था। वह राजा अत्यन्त अहंकारी था और सत्ता के नशे में चूर रहता था। प्रजा के सुख-दुःख से उसे कोई लगाव नहीं था। वह अपने ही भोग-विलास में डूबा रहता था। चाणक्य ने ऐसे दुष्ट राजा का वंश समूल रूप से नष्ट करने का संकल्प किया CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri