भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 180, कुल 196 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 180

सद्यः प्रज्ञाहरा तुण्डी सद्यः प्रज्ञाकरी वचा। सद्यः शक्तिहरा नारी सद्यः शक्तिकरं पयः॥ 'तुण्डी' (कुंदरू) को खाने से बुद्धि तत्काल नष्ट हो जाती है, 'वच' के सेवन से बुद्धि को शीघ्र विकास मिलता है, स्त्री के साथ समागम करने से शक्ति तत्काल नष्ट हो जाती है और दूध के प्रयोग से खोई हुई ताकत तत्काल वापस लौट आती है॥14॥ आचार्य चाणक्य ने उपरोक्त श्लोक में आयुर्वेद नीति का ज्ञान दिया है। उनके अनुसार नारी व्यक्ति को दुर्बल बनाती है, अतः उससे बचना चाहिए। बुद्धि और ताकत के लिए 'वच' और 'दूध' का प्रयोग करना हितकर रहता है, क्योंकि ये दोनों तुरंत असर करने वाले हैं। परोपकरणं येषां जागर्ति हृदये सताम्। नश्यन्ति विपदस्तेषां सम्पदः स्युः पदे पदे॥15॥ जिन सज्जनों के हृदय में परोपकार की भावना जाग्रत रहती है, उनकी तमाम विपत्तियां अपने आप दूर हो जाती हैं और उन्हें पग-पग पर सम्पत्ति एवं धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है॥15॥ यहां चाणक्य के कहने का अर्थ यह है कि परोपकार ही जीवन है। अपना पेट तो पशु भी भर लेता है। यदि पेट पालना ही जीवन का उद्देश्य है तो मानवता क्या हुई? स्वार्थी मनुष्य का जीवन निरर्थक है। यदि रामा यदि च रमा यद्यपि तनयो विनयगुणोपेतः। यदि तनये तनयोत्पत्तिः सुरवरनगरे किमाधिक्यम्॥ यदि स्त्री सुंदर हो और घर में लक्ष्मी हो, पुत्र विनम्रता आदि 178 CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri