सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुणों से युक्त हो और पुत्र का पुत्र घर में हो तो इससे बढ़कर सुख तो इन्द्रलोक में भी नहीं। ऐसी स्थिति में स्वर्ग घर में ही है।। 16।। आचार्य चाणक्य ने प्रस्तुत श्लोक में बताया है कि उत्तम पत्नी, आवश्यक धन-धान्य, सुशील पुत्र और पोते आंगन में खेल रहे हों तो यही सब स्वर्गिक आनंद है। स्वर्ग कहां है? स्वर्ग आकाश में नहीं है, स्वर्ग इसी भूतल पर है। आचार्य का सुंदर पत्नी से आशय सिर्फ रूप की सुंदरता से नहीं है बल्कि गुण की सुंदरता से भी है। गुण की सुंदरता महान बताई गई है। पत्नी यदि पति धर्म निभाने वाली हो तो तभी पुरुष के लिए पृथ्वी स्वर्ग समान है। इसी प्रकार पुत्र आदि आज्ञाकारी हो तभी पुत्र का होना सार्थक है अन्यथा इस पृथ्वी स्वर्ग समान है, इसी प्रकार पुत्र आदि आज्ञाकारी हो तभी पुत्र का होना सार्थक है अन्यथा यह पृथ्वी स्वर्ग के बजाय नर्क समान बन जाती है। आहरनिद्रामय मैथुननानि, समानि चैतानि नृणा पशूनाम। ज्ञानपं नराणामधिको विशेषो ज्ञानेन हीनाः पशुभिः समानाः॥ भोजन, नींद, डर, संभोग आदि, ये वृत्ति (गुण) मनुष्य और पशुओं में समान रूप से पाई जाती हैं। पशुओं की अपेक्षा मनुष्यों में केवल ज्ञान (बुद्धि) एक विशेष गुण, उसे अलग से प्राप्त है। अतः ज्ञान के बिना मनुष्य पशु के समान ही होता है।। 17।। आचार्य चाणक्य ने प्रस्तुत श्लोक में मनुष्य के पशु से अलग होने का जो गुण बताया है वह है उसकी ज्ञानशक्ति। ज्ञान से मनुष्य उन्नत होता है। ज्ञान से मनुष्य मोक्ष प्राप्त करता है। ज्ञान द्वारा ही मनुष्य के नैतिक गुणों का विकास होता है। नैतिक गुण है सत्य, न्याय, धर्म, हिंसा, परोपकार, दान, विनयशीलता। 179