सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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यौवन का मोती एक बार नष्ट हो जाए, अर्थात् जवानी एक बार चली जाए तो फिर लौटकर नहीं आती। यह देखकर अपने यौवन को सत्कर्मों में लगाना चाहिए। व्यालाश्रयापि विफलापि सकण्टकापि, वक्रापि पंकिलभवापि दुरासदाऽपि। गन्धेन बन्धुरसि केतकि सर्वजन्तोर् एको गुणः खलु निहन्ति समस्त दोषान्॥ हे केतकी! यद्यपि तू सांपों का घर है, फलहीन है, कांटेदार है, टेढ़ी भी है, कीचड़ में ही पैदा होती है, बड़ी मुश्किल से तू मिलती भी है, तब भी सुगंध रूपी गुण से तुम सभी को प्रिय लगती हो। वाकई एक ही गुण सभी दोषों को नष्ट कर देता है॥21॥ भाव यह है कि आदमी में चाहे कितने ही अवगुण क्यों न हों, पर यदि उसका एक ही गुण सभी दुर्गुणों पर भारी पड़ता है तो उसके सारे दोषों को अनदेखा किया जा सकता है।