सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउपदेश नहीं देना चाहिए, पतित आचरण वाली स्त्री की संगति करना तथा दुःखी मनुष्यों के साथ समागम करने से विद्वान तथा भले व्यक्ति को दुःख ही उठाना पड़ता है॥4॥ वास्तव में शिक्षा उसी व्यक्ति को देनी चाहिए जो सुपात्र हो। जो व्यक्ति बताई गई बात को न समझे, उसे परामर्श (शिक्षा) देने से कोई लाभ नहीं। मूर्ख व्यक्ति को शिक्षा देकर समय ही नष्ट किया जाता है। इसी तरह पतिता स्त्री का भरण-पोषण अथवा उसकी संगति करके विद्वान व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंच सकती है, उसका अपमान हो सकता है। यही बात दुःखी व्यक्ति के साथ संबंध रखने की है। दुःखी व्यक्ति हर पल अपना ही रोना रोता रहता है। इससे विद्वान व्यक्ति की साधना और एकाग्रता भंग हो जाती है। एकाग्रता भंग होना अथवा साधना में व्यवधान पड़ना बुद्धिमान व्यक्ति को बहुत कचोटता है। दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः। ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः॥ दुष्ट स्त्री, छल करने वाला मित्र, पलटकर तीखा जवाब देने वाला नौकर तथा जिस घर में सांप रहता हो, उस घर में निवास करने वाले गृहस्वामी की मौत में संशय न करें। वह निश्चित मृत्यु को प्राप्त होता है॥5॥ घर में यदि दुष्ट और दुश्चरित्र पत्नी हो तो उसके पति का जीना, न जीने के बराबर ही है। वह अपमान और लज्जा के बोझ से एक तो वैसे ही मृतक समान है, ऊपर से उसे सदैव यह भय भी बना रहता है कि यह स्त्री अपने स्वार्थ के लिए कहीं उसे विष न दे दे, क्योंकि ऐसी दुष्ट और पतिता स्त्रियों 17 CCO. Vasishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri