सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्वीकार करने में देर नहीं लगानी चाहिए। इसी प्रकार यदि किसी अशुद्ध स्थान पर स्वर्ण अथवा स्वर्ण से निर्मित आभूषण पड़े मिलें तो उन्हें स्वीकार कर लेना चाहिए। भाव यह है कि गुण जहां से भी मिलें, उन्हें ग्रहण करने में संकोच नहीं करना चाहिए। दुर्गुणों से युक्त व्यक्ति में भी अगर कोई सद्गुण है तो उसे अवश्य ही ग्रहण करना चाहिए। यही बात आगे भी कही गई है कि यदि नीच कुल वाले व्यक्ति से श्रेष्ठ विद्या प्राप्त हो तो उसे तत्काल ग्रहण करें और दुष्ट कुल में जन्म लेने वाली स्त्री में यदि कुलीन गुणों अथवा किसी विशेष कला का प्रादुर्भाव हुआ हो तो उस स्त्री को पाने में संकोच नहीं करना चाहिए। भाव यही है कि श्रेष्ठ गुण जहां से भी और जिस स्थिति में भी प्राप्त होते हों, उन्हें ग्रहण करना श्रेष्ठता का ही प्रतीक है। स्त्रीणां द्विगुण आहारो बुद्धिस्तासां चतुर्गुणाः। साहसं षड्गुणं चैव कामोऽष्टगुण उच्यते॥ पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों का भोजन दुगुना, लज्जा चौगुनी, साहस छः गुना और काम (रति इच्छा) आठ गुना अधिक होता है॥17॥ चाणक्य के अनुसार स्त्रियां पुरुषों से दो गुना भोजन करती हैं। स्त्रियों में लाज का भाव पुरुष से चार गुना होता है। उनमें साहस पुरुष से छः गुना होता है, अर्थात स्त्री किसी भी पुरुष से अधिक सहनशील और साहसी होती है। इसके अतिरिक्त स्त्री में रति इच्छा पुरुष से आठ गुना अधिक होती है। चाणक्य ने ये निष्कर्ष किस आधार पर निकाले थे इस विषय में विश्वासपूर्वक कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में आज की स्थिति सर्वथा भिन्न है। आज पुरुष 26