भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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प्रकाशकीय 'चाणक्य नीति' भारतीय इतिहास और संस्कृति की ऐसी अनमोल निधि है, जिस पर हम भारत के नागरिक गर्व से मस्तक ऊंचा करके इस बात को कह सकते हैं कि भारतीय दार्शनिक, चिंतक, विचारक और लेखक यूनान के विद्वानों से किसी भी तरह कम नहीं रहे। लगभग दो हज़ार चार सौ वर्ष पूर्व नालन्दा महाविद्यालय के आचार्य चाणक्य ने उस काल की व्यवस्था का वर्णन अपनी 'चाणक्य नीति' में किया है, जिसके द्वारा मित्र-भेद से लेकर दुश्मन तक की पहचान, पति-परायण तथा चरित्रहीन स्त्रियों में विभेद, राजा का कर्त्तव्य और जनता के अधिकारों तथा वर्ण-व्यवस्था का उचित निदान हो जाता है। महापण्डित आचार्य चाणक्य की 'चाणक्य नीति' के सत्रह अध्याय हैं। वे वेदान्त द्वारा निर्दिष्ट मानव के सूक्ष्म शरीर के सत्रह अवयवों—पांच प्राण (प्राण, अपान, व्यान, समान और उदान), पांच ज्ञानेन्द्रियां (नेत्र, श्रोत्र, नासिका, जिह्वा तथा त्वचा), पांच कर्मेन्द्रियां (हाथ, पैर, गुदा, लिंग व वाणी), एक मन, एक बुद्धि (5+5+5+1+1=17) के प्रतीक हैं। इस प्रकार इस ग्रंथ के सत्रह अध्यायों के ज्ञान से मनुष्य के सूक्ष्म शरीर के सत्रह अवयवों का कल्याण होता है। महात्मा चाणक्य की एक और रचना 'चाणक्य सूत्र' अपने आप में एक महान ग्रंथ है। इस रचना में आचार्य ने एक-एक सूत्र में मानो गागर में सागर भर दिया है। यह रचना न केवल भारत की भावी पीढ़ियों के लिए वरदान है, बल्कि संपूर्ण संसार इसी से अभिभूत है। आचार्य चाणक्य ने अपने छोटे-छोटे सूत्रों में राजा से लेकर जन-साधारण तक के लिए जैसी आचार संहिता बनाई थी, वह आचार्य चाणक्य जैसे किसी अत्यंत निपुण व्यक्ति द्वारा ही संभव थी। चाणक्य के सूत्रों से जो तेज, दृढ़ता, साहस,