सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकिं जातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसन्तापकारकै। वरमेकः कुलाऽलम्बी यत्र विश्राम्यते कुलम्॥ शोक और दुःख देने वाले बहुत-से पुत्रों को पैदा करने से क्या लाभ है? कुल को आश्रय देने वाला तो एक पुत्र ही सबसे अच्छा होता है॥17॥ महाभारत में धृतराष्ट्र के सौ पुत्र थे, पर सभी ने उसे दुःख ही पहुंचाया। वे सभी महाभारत युद्ध के कारण बने। जबकि पांच पाण्डवों ने धर्म के मार्ग पर चलकर विजय श्री प्राप्त की और वंश का नाम सुशोभित किया। यहां चाणक्य ने हजार दुर्गुणों पर एक ही श्रेष्ठता को महत्त्व दिया है। एक श्रेष्ठ और गुणी पुत्र सौ दुष्ट पुत्रों से अच्छा होता है। दुःख देने वाले कई पुत्रों से कुल के नाम को बढ़ाने वाला तथा सहारा देने वाला एक ही पुत्र काफी होता है। लालयेत् पंच वर्षाणि दश वर्षाणि ताडयेत्। प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्॥ पुत्र से पांच वर्ष तक प्यार करना चाहिए। उसके बाद दस वर्ष तक अर्थात पंद्रह वर्ष की आयु तक उसे दंड आदि देते हुए अच्छे कार्य की ओर लगाना चाहिए। सोलहवां साल आने पर मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए। संसार में जो कुछ भी भला-बुरा है, उसका उसे ज्ञान कराना चाहिए॥18॥ इस प्रकार एक पिता अपने पुत्र के जीवन को भली-भांति सवांर सकता है और उसे गलत मार्ग पर बढ़ने से रोक सकता है। उपसर्गेऽन्यचक्रे च दुर्भिक्षे च भयावहे। असाधुजनसम्पर्केयः पलायेत् सः जीवति॥ देश में भयानक उपद्रव होने पर, शत्रु के आक्रमण के 50 CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri