सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमय, भयानक दुर्भिक्ष (अकाल) के समय, दुष्ट का साथ होने पर, जो भाग जाता है, वही जीवित रहता है॥19॥ दैवीय उत्पात के समय, शत्रु के आक्रमण के समय, अकाल पड़ने पर और दुष्ट का साथ होने पर व्यक्ति को अपना बचाव करना चाहिए तभी प्राण रक्षा संभव है। धर्मार्थकाममोक्षाणां यस्यैकोऽपि न विद्यते। जन्म-जन्मनि मर्त्येषु मरणं तस्य केवलम्॥ जिसके पास धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इनमें से एक भी नहीं है, उसके लिए जन्म लेने का फल केवल मृत्यु ही होता है॥20॥ आचार्य चाणक्य ने यहां धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला है। धर्म से सद्कर्मों की प्रेरणा प्राप्त होती है, अर्थ से जीवन समृद्ध होता है, काम जीवन की शाश्वत अनिवार्यता है और मोक्ष के द्वारा मनुष्य जीवन-मृत्यु के आवागमन से मुक्त हो जाता है। ये सब मनुष्य जीवन में ही संभव है। मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है इसीलिए ऋषि-मुनियों ने जीवन के इन चार श्रेष्ठ तत्त्वों का विवेचन किया है। मूर्खा यत्र न पूज्यंते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्। दाम्पत्योः कलहो नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागता॥ जहां मूर्खों का सम्मान नहीं होता, जहां अन्न भंडार सुरक्षित रहता है, जहां पति-पत्नी में कभी झगड़ा नहीं होता, वहां लक्ष्मी बिना बुलाए ही निवास करती हैं॥21॥ भाव यह है कि जिस देश में मूर्खों की जगह विद्वानों का सम्मान होता है, जहां समुचित अन्न भंडार रहता है, जहां परिवार और घर-गृहस्थी में प्यार बना रहता है, वहां सुख-समृद्धि बराबर बनी रहती है। 51 CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri