सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहै। विद्या से सभी फल समय पर प्राप्त होते हैं। परदेस में विद्या माता के समान रक्षा करती है। विद्वानों ने विद्या को गुप्त धन कहा है, अर्थात विद्या वह धन है जो आपातकाल में काम आती है। इसका न तो हरण किया जा सकता है न ही इसे चुराया जा सकता है॥5॥ विद्या सभी प्रकार से सुरक्षित और समय पड़ने पर रक्षा करने वाली है। इसे जितना दिया जाता है, यह उतनी ही बढ़ती है। इससे बड़ा धन कोई दूसरा नहीं है। इसे न ही कोई छीन सकता और न ही कोई आपस में बांट सकता। वरमेको गुणी पुत्रो निर्गुणैश्च शतैरपि। एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च ताराः सहस्रशः॥ सैकड़ों अज्ञानी पुत्रों से एक ही गुणवान पुत्र अच्छा है। रात्रि का अंधकार एक ही चंद्रमा दूर करता है, न कि हजारों तारें॥6॥ इसी प्रकार के तीन श्लोक अध्याय तीन में संख्या 14, 16 और 17 भी हैं। आचार्य चाणक्य ने इस प्रकार बार-बार गुणी पुत्र के होने की बात कही है। गुणी पुत्र जीवन-भर सुख देने वाला होता है। मूर्खश्चिरायुर्जातोऽपि तस्माज्जातमृतो वरः। मृतः स चाल्पदुःखाय यावज्जीवं जडो दहेत्॥ बहुत बड़ी आयु वाले मूर्ख पुत्र की अपेक्षा पैदा होते ही जो मर गया, वह अच्छा है क्योंकि मरा हुआ पुत्र कुछ देर के लिए ही कष्ट देता है, परंतु मूर्ख पुत्र जीवन-भर जलाता है॥7॥ मूर्ख पुत्र के विषय में चाणक्य ने अध्याय तीन में श्लोक संख्या 15 में भी यही बात कही है। मूर्ख पुत्र जीवन-भर का दुःख होता है। 54 CC0. Vasishta Tripathi Collection. Digitized by eGangotri