सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
पृष्ठ 59, कुल 196 में से
संदर्भ में पढ़ेंइसलिए है कि स्वर के उतार-चढ़ाव के लिए एक से अधिक गले की, तीन की आवश्यकता होती है तभी सही लय-सुर बन पाता है। यात्रा के लिए चार व्यक्तियों की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि चारों दिशाओं के खतरे के प्रति सावधान रहा जा सके। खेत बोने के लिए पांच व्यक्तियों की आवश्यकता इसलिए बताई गई है ताकि चारों कोने और बीच का भाग सही तरह से बोया जा सके। युद्ध के लिए सेना का महत्त्व सभी जानते हैं। सा भार्या या शुचिर्दक्षा सा भार्या या पतिव्रता। सा भार्या या पतिप्रीता सा भार्या सत्यवादिनी॥ पत्नी वही है जो पवित्र और चतुर है, पतिव्रता है, पत्नी वही है जिस पर पति का प्रेम है, पत्नी वही है जो सदैव सत्य बोलती है।।13।। यहां आचार्य चाणक्य ने पत्नी के श्रेष्ठ स्वरूप के बारे में बताते हुए कहा है कि जो पत्नी समय पर चतुराई से काम निकालना जानती है और जो सदैव अपने पति के प्रति समर्पित, पवित्र, पतिव्रता, पति प्रेम की पात्रा और सच बोलने वाली है, वही सच्ची पत्नी है। अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यास्त्वबांधवाः। मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्या दरिद्रता॥ बिना पुत्र के घर सूना है। बिना बंधु-बांधवों के दिशाएं सूनी हैं। मूर्ख का हृदय भावों से सूना है। दरिद्रता सबसे सूनी है, अर्थात दरिद्रता का जीवन महाकष्टकारक है।।14।। पुत्र के बिना वंश-बेल सूख जाती है। पिता को अपना ही घर सूना लगने लगता है। बंधु-बांधवों के न होने पर वह कहीं आ-जा नहीं सकता, सारी दिशाएं उसे सूनी लगने लगती हैं। मूर्ख 57 CC0 Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri