भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 196 में से

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सुख-शान्ति प्राप्त हो सकती है—सुपुत्र से, पतिव्रता स्त्री से और सद्‍संगति से॥10॥ संसार दुःखों का सागर है। यहां हर पल कोई-न-कोई दुःख मनुष्य को सताता ही रहता है। ऐसे दुःखमय संसार में यदि उसे सुपुत्र, पतिव्रता स्त्री और सज्जनों की संगति मिल जाए तो उसे चिंता, दुःख व अशान्ति से बहुत राहत मिल सकती है। सकृज्जल्पन्ति राजानः सकृज्जल्पन्ति पण्डिताः। सकृत् कन्याः प्रदीयन्ते त्रीण्येतानि सकृत्सकृत्॥ राजा लोग एक ही बार बोलते हैं (आज्ञा देते हैं), पंडित लोग किसी कर्म के लिए एक ही बार बोलते हैं (बार-बार श्लोक नहीं पढ़ते), कन्याएं भी एक ही बार दी जाती हैं। ये तीन एक ही बार होने से विशेष महत्त्व रखते हैं॥11॥ राजा का, विद्वान का और कन्या के पिता का वचन अथवा कथन अटल होता है। इनके वचन लौटाए नहीं जा सकते। इसी प्रकार अच्छे कर्म के लिए बार-बार नहीं कहा जाता। एकाकिना तपो द्वाभ्यां पठनं गायनं त्रिभिः। चतुर्भिर्गमनं क्षेत्रं पंचभिर्बहुभी रणः॥ तपस्या अकेले में, अध्ययन (पढ़ाई) दो के साथ, गाना तीन के साथ, यात्रा चार के साथ, खेती पांच के साथ और युद्ध बहुत से सहायकों के साथ होने पर ही उत्तम होता है॥12॥ आचार्य चाणक्य ने उक्त श्लोक के माध्यम से जानकारी दी है कि मनुष्य को तप अर्थात ईश्वरभक्ति करनी हो तो उसे एकांत स्थान खोजना चाहिए। अध्ययन दो व्यक्ति मिलकर करें। मिलकर अध्ययन करने का लाभ यह है कि आपस में अध्ययन संबंधी विषय पर विचार-विमर्श भी साथ-साथ चलता रह सकता है। गाने के विषय में तीन लोगों की महत्ता 56

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