सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्ययन की प्रक्रिया को निरंतर बनाए न रखा जाए तो जो विद्या अर्जित की जाती है, वह धीरे-धीरे स्मृति से मिटने लगती है। अतः विद्या, स्त्री, कृषि और सेना के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। अभ्यासाद्धार्यते विद्या कुलं शीलेन धार्यते। गुणेन ज्ञायते त्वार्यः कोपो नेत्रेण गम्यते॥ विद्या अभ्यास से आती है, सुशील स्वभाव से कुल का बड़प्पन होता है। श्रेष्ठत्व की पहचान गुणों से होती है और क्रोध का पता आंखों से लगता है॥४॥ इस प्रकार विद्या की रक्षा के लिए अभ्यास करते रहना जरूरी है। शील-स्वभाव से कुल को मान-सम्मान मिलता है, सद्गुणों से श्रेष्ठता का पता चलता है और क्रोध का पता आंखों से लग जाता है। भाव यह है कि मनुष्य यदि अपने भावों को छिपाना भी चाहे तो छिपा नहीं सकता। स्वभाव, गुण और चेहरे से मनुष्य का पूरा परिचय मिल जाता है। वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते। मृदुना रक्ष्येत भूपः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम्॥ धर्म की रक्षा धन से, विद्या की रक्षा निरंतर साधना से, राजा की रक्षा मृदु स्वभाव से और पतिव्रता स्त्रियों से घर की रक्षा होती है॥9॥ धर्मानुष्ठान (यज्ञ, धर्मशालाएं, तीर्थाटन, मंदिर निर्माण, पूजा आदि) के लिए धन अनिवार्य होता है। बिना अभ्यास के विद्या भी पास नहीं टिकती। राजा अपने मृदु स्वभाव से ही प्रजा को अपने अनुकूल करता है और कुलीन स्त्रियों से ही घर-गृहस्थी की मर्यादा बनी रहती है। अतः इसका ध्यान रखना बहुत जरूरीं है। 65 CC0 Vashistha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri