भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 196 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 66

रखता है। जो चालाक और धूर्त होते हैं, वे ही मधुर वचन बोलते हैं, मूर्ख नहीं। साफ-साफ बोलने वाला कड़वा जरूर होता है, पर धोखेबाज नहीं होता। मूर्खाणां पंडिता द्वेष्याः अधनानां महाधनाः। वाराऽऽ ङ्गनाः कुलस्त्रीणां सुभगानां च दुर्भगाः॥ मूर्खों के पंडित, दरिद्रों के धनी, विधवाओं की सुहागिनें और वेश्याओं की कुल-धर्म रखने वाली पतिव्रता स्त्रियां शत्रु होती हैं॥6॥ यह सांसारिक नियम है कि मूर्ख व्यक्ति पंडितों से ईर्ष्या करते हैं, निर्धन व्यक्ति धनिकों से ईर्ष्या करते हैं। वेश्याएं या व्यभिचारिणी स्त्रियां पतिव्रत धर्म का पालन करने वाली कुल-वधुओं से ईर्ष्या करती हैं और विधवाएं सुहागिनों को देखकर अपने भाग्य को कोसती रहती हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। दूसरे को सुखी देखकर कोई सुखी नहीं होता। आलस्योपहता विद्या परहस्तगतं स्त्रियः। अल्पबीजं हतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्॥ आलस्य से (अध्ययन न करना) विद्या नष्ट हो जाती है। दूसरे के पास गई स्त्री, बीज की कमी से खेती और सेनापति के न होने से सेना नष्ट हो जाती है॥7॥ युद्ध क्षेत्र में सेनानायक का अभाव सेना का मनोबल तोड़ देता है और वह शत्रु का सामना न करके भागने लगती है और हार जाती है। इसी प्रकार यदि खेत में पर्याप्त बीज न डाला जाए तो खेती अथवा उपज ठीक से नहीं हो पाती। दूसरे के पास गई स्त्री के सकुशल लौटने की उम्मीद कम ही रहती है और यदि 64 CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri सम्पूर्ण चाणक्य नीति-4