भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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प्रस्तावना 'चाणक्य' विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक चरित्र है। नालन्दा विश्वविद्यालय का आचार्य, महापण्डित चाणक्य अपने समय का एक ऐसा क्रान्तिदृष्टा विचारक और प्रबुद्ध राजनीतिज्ञ था, जो इतिहास को एक नया मोड़ देने की क्षमता रखता था। वह अत्यन्त दूरदर्शी और कुशाग्र बुद्धि का स्वामी था। ईसा पूर्व चौथी शताब्दी का यह वह काल था, जब भारत के पश्चिमोत्तर इलाके से विदेशी शक्तियां भारत पर आक्रमण कर रही थीं। भारत की विपुल सम्पदा का लालच उन्हें यहां खींचकर ला रहा था। उस समय समस्त भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था। कोई भी राजा अपने पड़ोसी राजा की सहायता के लिए तैयार नहीं था। सभी अपने-अपने राज्य की सीमाओं में सिमटे, अपनी स्वार्थ-सिद्धि में ही अपनी शक्ति को नष्ट कर रहे थे। एक राष्ट्र की भावना को दूर-दूर तक कोई नहीं जानता था। दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि राष्ट्र की भावना को कोई भी पहचानना ही नहीं चाहता था। ऐसे समय में सर्वप्रथम आचार्य चाणक्य ने भारत में एक राष्ट्र की कल्पना की। वे यह बात अच्छी तरह से समझ चुके थे कि जब तक भारत के ये छोटे-छोटे राज्य एक झण्डे के नीचे नहीं आएंगे, जब तक इनके भीतर देशप्रेम की भावना का उदय नहीं होगा, जब तक ये संगठित होकर विदेशी आक्रमणकारी शत्रु का सामना नहीं करेंगे, जब तक एक राष्ट्र के लिए ये अपने तुच्छ और निजी स्वार्थों का परित्याग नहीं करेंगे, तब तक भारत की अखण्डता और अस्मिता को सुरक्षित रख पाना कदापि सम्भव नहीं होगा। भारत की स्वाधीनता के बाद विभिन्न रियासतों और रजवाड़ों को भारतीय संघ में मिलाने का जो दुष्कर कार्य सरदार CC0. Vasishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri