सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजीवन और सभी चराचर पदार्थ समय आने पर नष्ट हो जाने वाले हैं, लेकिन धर्म अजर-अमर है। मनुष्य का सभी करा-धरा यहीं रह जाएगा, केवल धर्म ही उसके साथ जाएगा। अतः धर्म का संग्रह करना ही श्रेष्ठ है। नराणां नापितो धूर्तः पक्षिणां चैव वायसः। चतुष्पदां शृगालस्तु स्त्रीणां धूर्ता च मालिनी॥ पुरुषों में नाई धूर्त होता है, पक्षियों में कौवा, पशुओं में गीदड़ और स्त्रियों में मालिन धूर्त होती है।।21।। ये चारों सदैव दूसरों के कार्य को बिगाड़ने वाले होते हैं। जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति। अन्नदाता भयत्राता पञ्चैते पितरः स्मृताः॥ मनुष्य को जन्म देने वाला, यज्ञोपवीत संस्कार कराने वाला पुरोहित, विद्या देने वाला आचार्य, अन्न देने वाला, भय से मुक्ति दिलाने वाला अथवा रक्षा करने वाला, ये पांच पिता कहे गए हैं।।22।। पिता जीवन देता है, पुरोहित समाज में प्रतिष्ठित करने के लिए यज्ञोपवीत संस्कार कराता है, आचार्य ज्ञान देकर जीवन और जगत के समस्त कार्य-व्यापार से परिचित कराता है, अन्न उत्पन्न करने वाला कृषक हमारे लिए भोजन की व्यवस्था करता है और राजा हमारी शत्रु से रक्षा करके हमें भयमुक्त करता है। अतः समाज ने इन्हें पिता अर्थात-पालन करने वाले का उच्च स्थान दिया है। 71 CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri