सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ अथ षष्ठम अध्याय ॥ श्रुत्वा धर्मं विजानाति श्रुत्वा त्यजति दुर्मतिम्। श्रुत्वा ज्ञानमवाप्नोति श्रुत्वा मोक्षमवाप्नुयात्॥ मनुष्य शास्त्रों को पढ़कर धर्म को जानता है और मूर्खता को त्यागकर ज्ञान प्राप्त करता है तथा शास्त्रों को सुनकर मोक्ष प्राप्त करता है॥1॥ धर्मोपदेशक के प्रवचन सुनकर ही बहुत-से भक्तजन अपना जीवन संवार लेते हैं। गुरु भी जब शिक्षा देता है, तब वह अपने शिष्यों को बोलकर ही विद्यादान देता है और शिष्य श्रवण करके ही ज्ञान प्राप्त करते हैं। पक्षिणां काकश्चाण्डालः पशूनां चैव कुक्कुरः। मुनीनां कोपीचाण्डालः सर्वेषां चैव निन्दकः॥ पक्षियों में कौआ, पशुओं में कुत्ता, ऋषि-मुनियों में क्रोध करने वाला और मनुष्यों में चुगली करने वाला चांडाल अर्थात नीच होता है॥2॥ पापकर्म व चुगली करना मानव-जीवन के दोष माने गए हैं। इन्हें करने वाला मनुष्य ऋषि-मुनि होने पर भी चांडाल होता है, जैसे