भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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पक्षियों में कौए और पशुओं में कुत्ते को नीच माना गया है। भस्मना शुद्ध्यते कांस्यं ताम्रमम्लेन शुद्ध्यते। रजसा शुद्ध्यते नारी नदी वेगेन शुद्ध्यति॥ कांसे का पात्र राख द्वारा मांजने से शुद्ध होता है, तांबे का पात्र खटाई के रगड़ने से शुद्ध होता है। स्त्री रजस्वला होने से पवित्र होती है और नदी तीव्र गति से बहने से निर्मल हो जाती है॥३॥ हर वस्तु और प्राणी की अपनी-अपनी प्रवृत्ति है। नदी का पानी यदि रुक जाए तो वह नदी नहीं रहती। उसका रुका हुआ पानी गंदा हो जाता है। पानी जब वेग से बहता है, तभी वह शुद्ध होता है। इसी प्रकार रजस्वला होने के बाद ही स्त्री गर्भ धारण करने योग्य बनती है और तांबे के बर्तन को अम्ल (खटाई) से और कांसे के बर्तन को राख से मांजकर शुद्ध किया जा सकता है। किसी मनुष्य की गंदी आदतों को शुद्ध करने के लिए इसी भांति साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनानी चाहिए, ऐसा आचार्य चाणक्य का मत है। भ्रमन् सम्पूज्यते राजा भ्रमन् सम्पूज्यते द्विजः। भ्रमन् सम्पूज्यते योगी भ्रमन्ती स्त्री भ्रमन्ती विनश्यति॥ प्रजा की रक्षा के लिए भ्रमण करने वाला राजा सम्मानित होता है, भ्रमण करने वाला योगी और ब्राह्मण सम्मानित होता है, किन्तु इधर-उधर घूमने वाली स्त्री भ्रष्ट होकर नष्ट हो जाती है॥४॥ जो राजा प्रजा के सुख-दुख में सम्मिलित होकर उनकी परेशानियों को दूर करता है, प्रजा उस राजा का सदैव आदर करती है। इसी प्रकार जो योगी और ब्राह्मण प्रजा के हित में भ्रमण करते रहते हैं और उनके सभी धार्मिक, सामाजिक आर्थिक कार्यों में उनकी मंगलकामना करते हैं, लोग 73 CCO. Vasishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri