सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउनका सम्मान करते हैं, उन्हें पूज्य मानते हैं परंतु इधर-उधर भटकने वाली स्त्री पतित होकर नष्ट हो जाती है। यस्याऽर्थास्तस्य मित्राणि यस्याऽर्थास्तस्य बांधवाः। यस्याऽर्थाः स पुमांल्लोके यस्याऽर्थाः स च पण्डितः॥ जिसके पास धन है उसके अनेक मित्र होते हैं, उसी के अनेक बंधु-बांधव होते हैं, वही पुरुष कहलाता है और वही पंडित कहलाता है॥5॥ धन का महत्त्व इतना बड़ा है कि जिसके पास यह होता है, सब उसे ही महापुरुष, पंडित (विद्वान) और सबका हितैषी मानने लगते हैं। सब उससे मित्रता करना चाहते हैं और उससे संबंध बनाना चाहते हैं। उसके सभी दोष, अवगुण और व्यसन पैसे की चकाचौंध के सामने छिप जाते हैं। तादृशी जायते बुद्धिव्यवसायोऽपि तादृशः। सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता॥ जैसी होनहार होती है, वैसी ही बुद्धि हो जाती है, उद्योग-धंधा भी वैसा ही हो जाता है और सहायक भी वैसे ही मिल जाते हैं॥6॥ 'होनी बलवान है' यह मुहावरा काफी प्रचलित है। आदमी के भाग्य में जो लिखा है, वह होकर ही रहता है। उसी के अनुसार सारे बानक बनते चले जाते हैं। आदमी कुछ नहीं करता, उसका भाग्य ही सब कुछ करता है। कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः। कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः॥ काल (समय, मृत्यु) ही पंच भूतों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश) को पचाता है और सब प्राणियों 74 CC0 Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri