सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमनुष्य सामर्थ्य तो ज्यादा पाने की रखे, किंतु जो मिल जाए उसी पर संतोष कर लेना चाहिए। अच्छी नींद लेनी चाहिए, परंतु सतर्क और चौकन्ना भी रहना चाहिए। अपने मालिक के प्रति स्वामिभक्ति रखनी चाहिए और समय आने पर शूरवीरता दिखाने में पीछे नहीं हटना चाहिए। ये छः गुण कुत्ते में मिल जाते हैं। इसी अध्याय के दूसरे श्लोक में आचार्य चाणक्य ने कुत्ते को नीच जानवर भी कहा है। उन्होंने ऐसा क्यों कहा यह स्पष्ट नहीं है। य एतान् विंशतिगुणानाचरिष्यति मानवः। कार्याऽवस्थासु सर्वासु अजेयः स भविष्यति॥ जो मनुष्य उपरोक्त बीस गुणों को अपने जीवन में उतारकर आचरण करेगा, वह सदैव सभी कार्यों में विजय प्राप्त करेगा॥22॥ इस प्रकार, कोई भी कार्य छोटा हो या बड़ा, उसे एक बार हाथ में लेने पर इन्द्रियों को पूर्ण नियन्त्रण में रखते हुए पूरा करना चाहिए। यह शिक्षा हमें सिंह और बगुले से मिलती है। हमें किसी भी कार्य को बोझ नहीं समझना चाहिए, सर्दी-गर्मी और वातावरण के विपरीत प्रभाव से नहीं घबराना चाहिए तथा सदैव संतोष रखना चाहिए। ये तीन बातें हमें गधे से सीखनी चाहिए। प्रातःकाल जल्दी उठना, प्रतिद्वन्द्वी से संघर्ष करने के लिए सदैव तत्पर रहना, पास की खाद्य वस्तु को परस्पर बांटकर खाना और रति-क्रिया में अपनी स्त्री को संतुष्ट करना, ये चार बातें मुर्गे से सीखनी चाहिए। एकान्त में मैथुन करना, चतुराई में सबसे आगे रहना, 82