भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 196 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 83

आचार्य चाणक्य के उपरोक्त श्लोक में ठीक समय अर्थात प्रातःकाल जागने का गुण सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। अथर्ववेद में कहा गया है, जैसे उदय होता हुआ सूर्य सोते हुए आलसियों के तेज को हर लेता है उसी प्रकार एक वीर शत्रुओं के तेज और बल को खींच लेता है। सूर्योदय के पश्चात सोने वाले आलसी और निकम्मे हो जाते हैं, उनकी श्री नष्ट हो जाती है अतः सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए, यह मुर्गे का मुख्य गुण है। बंधुओं को उनका भाग देना चाहिए, शत्रु पर आक्रमण के लिए तैयार रहना चाहिए तथा खाने के मामले में भी आलस्य न करना चाहिए ताकि बल बना रहे। गूढ़ं च मैथुन धाष्ट्र्यं काले काले च संग्रहम्। अप्रमत्तमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्॥ मैथुन (स्त्री संभोग) गुप्त स्थान में करना चाहिए, छिपकर चलना चाहिए, समय-समय पर सभी इच्छित वस्तुओं का संग्रह करना चाहिए, सभी कार्यों में सावधानी रखनी चाहिए और किसी का जल्दी विश्वास नहीं करना चाहिए। ये पांच बातें कौवे से सीखनी चाहिए॥20॥ कौआ सदैव एकान्त में ही रति-क्रिया करता है, चालाकी से वह भोजन एकत्र करता रहता है, वह न तो कभी आलस्य और न किसी का विश्वास करता है। बह्वाशी स्वल्पसन्तुष्टः सुनिद्रो लघुचेतनः। स्वामिभक्तश्च शूरश्च षडेते श्वानतो गुणाः॥ बहुत भोजन करने की शक्ति रखने पर भी थोड़े भोजन से ही संतुष्ट हो जाए, अच्छी नींद सोए, परंतु जरा-से खटके पर ही जाग जाए, अपने रक्षक से प्रेम करे और शूरता दिखाए, इन छः गुणों को कुत्ते से सीखना चाहिए॥21॥ 81