सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंयम की आवश्यकता है, वही उसे इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि समय पर परिस्थितियां उस कार्यसिद्धि के लिए अनुकूल हैं अथवा नहीं। फल प्राप्ति की आशा में ध्यान लगाने से पहले देख लेना चाहिए कि वहां फल की संभावना है भी अथवा नहीं। बगुला वहीं ध्यान लगाकर बैठता है जहां मछली मिलने की आशा होती है, अन्यथा उड़कर दूसरी जगह चला जाता है। सुश्रान्तोऽपि वहेद् भारं शीतोष्णं च न पश्यति। सन्तुष्टश्चरते नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात्॥ अत्यंत थक जाने पर भी बोझ को ढोना, ठंडे-गर्म का विचार न करना, सदा संतोषपूर्वक विचरण करना, ये तीन बातें गधे से सीखनी चाहिए॥18॥ बुद्धिमान व्यक्ति को कभी भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। उसे अपने कार्य को बोझ नहीं समझना चाहिए। ऋतुओं के प्रभाव को भी अनदेखा कर देना चाहिए और संतोष के साथ अपने कार्य को करते रहना चाहिए। ये तीन गुण गधे में पाए जाते हैं। प्रत्युत्थानं च युद्धं च संविभागं च बन्धुषु। स्वयमाक्रम्य भुक्तं च शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्॥ ब्रह्ममुहूर्त में जागना, रण में पीछे न हटना, बंधुओं में किसी वस्तु का बराबर भाग करना और स्वयं चढ़ाई करके किसी से अपने भक्ष्य को छीन लेना, ये चारों बातें मुर्गे से सीखनी चाहिए। मुर्गे में ये चारों गुण होते हैं। वह सुबह उठकर बांग देता है। दूसरे मुर्गे से लड़ते हुए पीछे नहीं हटता, वह अपने खाद्य को अपने चूजों के साथ बांटकर खाता है और अपनी मुर्गी को समागम में संतुष्ट रखता है॥19॥ 80 सम्पूर्ण चाणक्य नीति-5