भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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छोड़ता। सिंह का यह एक गुण अवश्य लेना चाहिए।।16।। आचार्य चाणक्य ने उपरोक्त श्लोक के माध्यम से कहा है कि मनुष्य को चाहिए कि वह जो भी कार्य करे उसे पूरी शक्ति और लगन लगाकर करे। पूरा साहस और सामर्थ्य लगा दे। कार्य करते समय इस बात को न देखे कि कार्य बहुत छोटा है, उसे तो बस यूं ही कर लेंगे। यह अवस्था आलस्य की होती है। सिंह को हमला चाहे हाथी पर करना हो या फिर किसी मृग पर वह एक-सी आक्रामक मुद्रा अपनाकर, एक-से साहस और वीरता के साथ हमला करता है। यद्यपि हाथी और मृग पर हमलावर के उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। हाथी को बलशाली शत्रु मानकर उसे चोट पहुंचाने के लिए हमला करता है, पर मृग को अपना शिकार समझकर आक्रमण करता है, दोनों में वह एकरसता रखता है। इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरः। देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत्॥ सफल व्यक्ति वही है जो बगुले के समान अपनी सम्पूर्ण इन्द्रियों को संयम में रखकर अपना शिकार करता है। उसी के अनुसार देश, काल और अपनी सामर्थ्य को अच्छी प्रकार से समझकर अपने सभी कार्यों को करना चाहिए। बगुले से यह एक गुण ग्रहण करना चाहिए, अर्थात एकाग्रता के साथ अपना कार्य करें तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी, अर्थात कार्य को करते वक्त अपना सारा ध्यान उसी कार्य की ओर लगाना चाहिए, तभी सफलता मिलेगी।।17।। आचार्य चाणक्य ने उपरोक्त श्लोक के माध्यम से बताया है कि कार्यसिद्धि करने के लिए जहां एकाग्रचित्तता और 79