सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसभी आदरणीय हैं, पूजनीय हैं। इनको पैर से छूना इनका अपमान माना जाता है, इनकी उपेक्षा मानी जाती है। शकटं पंचहस्तेन दशहस्तेन वाजिनम्। हस्ती शतहस्तेन देशत्यागेन दुर्जनम्॥ बैलगाड़ी से पांच हाथ, घोड़े से दस हाथ, हाथी से हजार हाथ दूर बचकर रहना चाहिए और दुष्ट पुरुष (दुष्ट राजा) का देश ही छोड़ देना चाहिए॥7॥ गाड़ी में जुते हुए बैल सींग मार सकते हैं, घोड़ा दुलत्ती मार सकता है, हाथी अपनी सूंड में लपेटकर पटक सकता है और दुष्ट राजा तो जीवन ही खत्म कर सकता है। दुष्ट से सदैव बचकर रहना ही उचित है। उसके लिए अगर देश त्यागना पड़े तो वह भी करना चाहिए। जो जितना अधिक दुष्ट है, उससे उसी अनुपात में दूरी रखते हुए जीवन-यापन करना अच्छा होता है। हस्ती अंकुशहस्तेन वाजी हस्तेन ताड्यते। शृंगी लगुडहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः॥ हाथी को अंकुश से, घोड़े को चाबुक से, सींग वाले बैल को डंडे से और दुष्ट व्यक्ति को वश में करने के लिए हाथ में तलवार लेना आवश्यक है॥8॥ आचार्य चाणक्य के अनुसार दुष्ट व्यक्ति को आसानी से न तो वश में किया जा सकता है और न उसे सुधारा जा सकता है। ऐसे व्यक्ति को ठीक करने के लिए कभी-कभी उसे तलवार से मर्मान्तक चोट पहुंचानी पड़ती है। कभी-कभी उसे खत्म भी करना पड़ता है। 87