सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
महर्षि कपिल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ३८ ) हिन्दी सांख्य दर्शन स्वरूप से ही कोपनीय होती हैं, अतः १० शब्द आदि और ८ अणिमा आदि मिलकर १८ क्रोध के विषय होने से क्रोध या द्वेष १८ प्रकार का होता है । ( ५ ) अभिनिवेश (अन्धतामिस्र) । अणिमा आदि ८ ऐश्वर्य और शब्द आदि १०, कुल १८ विषयों या उपायों को प्राप्त होकर देवताओं को भय होता है, कि-इन्हें असुर न छीन लें। इस प्रकार भयका विषय १८ प्रकारका होनेसे भय या अन्धतामिस्र भी १८ प्रकार का होता है ॥४८॥ २८ प्रकार की अशक्ति । ( ११ इन्द्रिय बध, ६ अतुष्टियें और ८ असिद्धियें ) एकादशेन्द्रियबधाः सहबुद्धिबधैरशक्तिरुद्दिष्टा । सप्तदशबधा बुद्धे र्विपर्ययात्तुष्टिसिद्धीनाम् ॥४९॥ १७ बुद्धि बधों के सहित ११ इन्द्रियों के बधरूप २८ प्रकार की अतुष्टि कही गई है । तुष्टियों और सिद्धियोंके वि- परीत रूप सेअर्थात्-६ अतुष्टियों और ८असिद्धियों के रूप से बुद्धि-बध १७ होते हैं ॥ ४६ ॥ नवधा ( ६ ) तुष्टि । आध्यात्मिक्यश्चतस्रःप्रकृत्युपादानकालभाग्याख्याः बाह्याविषयोपरमात्पञ्च, नवतुष्टयोऽभिमताः ।५०। चार अध्यात्मिकी (भीतरी) तुष्टियें होती हैं। जिनके प्रकृति उपादानकाल और भाग्य ये नाम हैं'विषयों से उपरति ( निवृत्ति) के कारण बाह्य ( बांहरी ) तुष्टियें ५ होती हैं । सब मिलकर ६ तुष्टियें हैं । व्याख्या । 'प्रकृति से आत्मा भिन्न वस्तु है'-ऐसा निश्चय करके फिर इसके श्रवण, मनन और निदिध्यासन के द्वारा विवेक साक्षा-