भारतकोश
सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

Sankhya Darshana with Hindi Commentary

महर्षि कपिल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished81 पृष्ठ

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हिन्दी सांख्यदर्शन ( ३७ ) ५० भेदों के नाम । ( विपर्यय के भेदों के नाम ) ( १ ) विपर्यय- ( १ ) अविद्या ( तमः ) ( २ ) अस्मिता ( मोह ) ( ३ ) राग ( महामोह ) ( ४ ) द्वेष ( तामिस्र ) ( ५ ) अभिनिवेश ( अन्धतामिस्र ) ॥ ७७ । विपर्यय के भेदों के भेद । भेदस्तमसोऽष्टविधो मोहस्य च दशविधोमहामोहः । तामिस्रोऽष्टादशधा तथाभवत्यन्धतामिस्रः ॥ ४८ ॥ तम या अविद्या के ८ भेद हैं । मोह ( अस्मिता ) के ८ हैं । महामोह ( राग ) के १० भेद हैं । तामिस्र (द्वेष) के १८ भेद हैं । अन्धतामिस्र ( अभिनिवेश ) के १८ भेद हैं । कुल ६२ भेद हैं ) ॥ व्याख्या । ( १ ) तम या अविद्या अव्यक्त, महत्तत्व, अहंकार और शब्द आदि ५ तन्मात्रों में आत्म-बुद्धिरूप ८ प्रकार की होती है । ( २ ) अस्मिता या मोह । देवताओंको ८ प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्तिसे "यह अणिमा आदि हमारा शाश्वतिक (सदाका) ऐश्वर्य है" ऐसा अभिमान होता है, तद्रूप अस्मिता ८ प्रकार की होती है । ( ३ ) राग या महामोह-दिव्य अदिव्य शब्द आदि दशविध रञ्जनीय ( जिन में राग हो ) विषयों में आसक्तिरूप दश प्रकार का महामोह होता है । ( ४ ) द्वेष ( तामिस्र ) दिव्य अदिव्य भेद से १० प्रकार के शब्द आदि विषय परस्पर से उपघात किये जाते हुये द्वेष के विषय होते हैं और अणिमा आदि ८ सिद्धियें

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