भारतकोश
सांख्य दर्शन / सांख्यकारिका

सांख्य दर्शन / सांख्यकारिका

Sankhya Darshan & Samkhyakarika

महर्षि कपिल / ईश्वरकृष्ण द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished192 पृष्ठ

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( १६० ) घड़ा बनता है और अनुमान भी किया जाता है । इस प्रकार यह भी उक्त ( कहे हुये ) प्रमाणों से सिद्ध ( साबित ) हुआ कि बिना मिट्टी के घड़ा नहीं बन सकता है, इसलिये घट और मिट्टी का सम्बन्ध हुआ, लेकिन समवाय कोई सम्बन्ध नहीं है। प्र०—यदि समवाय सम्बन्ध न माना जाय तो दो कपालों का संयोग ( मेल ) घट की उत्पत्ति में हेतु होता है, उसको क्या कहेंगे और इस बात को कैसे जानेंगे कि दो कपालों का संयोग घट की उत्पत्ति में हेतु है । जिन दो अवयवों ( टुकड़ों के ) मिलने से घड़ा बनता है उसको कपाल कहते हैं ? उ०—नानुमेयत्वमेव क्रियया नेदिष्ठस्य तत्तद्रूमो रेष्वपरोक्षप्रतीतेः ॥१०१॥ अर्थ—क्रिया और क्रिया वाले का संयोग होकर घट बनता है, इस बात के जानने के लिये अनुमान की कोई आवश्यकता नहीं है ; क्योंकि धोरे रहनेवाले कुम्हार की प्रत्यक्ष क्रिया को देख कर ही जान लेते हैं कि दो कपालों के मिलने से घट बनता है, इसलिये जबतक वह घड़ा मौजूद रहेगा तबतक सम्बन्ध भी जरूर रहेगा ; इसके लिये समवाय सम्बन्ध के मानने की कोई ज़रूरत नहीं है। दूसरे अध्याय में यह मतभेद कह चुके हैं कि शरीर पंचभौतिक है । अब उन मतों की सत्यासत्यता दिखाते हैं कि वे मत सच्चे हैं या झूठे । न पांचभौतिकं शरीरं बहूनामुपादाना- योगात् ॥१०२॥ अर्थ—शरीर पंचभौतिक नहीं है अर्थात् पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश से शरीर की उत्पत्ति नहीं है, क्योंकि बहुत से पदार्थ एक पदार्थ के उपादान कारण ( जो जिससे बने, जैसे