संक्षिप्त योगवासिष्ठ

संक्षिप्त योगवासिष्ठ
Sankshipt Yoga Vasistha
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
DevanagariHindipublished750 पृष्ठ
पृष्ठ 27, कुल 750 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 27
<br>
( १८ )
| ११३—अरिष्टनेमि, सुरुचि, कारुण्य तथा सुतीक्ष्णकी कृतकृत्यताका प्रकाशन, शिष्योंका गुरुजनोंके प्रति आत्मनिवेदन तथा ब्रह्मको एव ब्रह्मभूत वसिष्ठजीको नमस्कार ... ६९७ | १३—क्षमा प्रार्थना और नम्र निवेदन (हनुमानप्रसाद पोद्दार, चिम्मनलाल गोस्वामी) ... ६९९<br><br>१४—जीवन्मुक्तका स्वरूप और आचार (कविता) ... ७०० |
चित्र-सूची
| सादे | |
|---|---|
| १—तीर्थयात्रासे लौटनेपर श्रीरामचन्द्रजीका स्वागत (प्रसंग वैराग्य-प्रकरण सर्ग ४) ... ४८ | ६—राजा दशरथसे श्रीरामद्वारा तीर्थयात्राके लिये आज्ञा माँगना ... २४ |
| २—सुरुचि और देवदूत (प्रसंग वैराग्य-प्रकरण सर्ग १) ... ११२ | ७—तीर्थयात्रासे लौटे हुए श्रीरामका राजसभामें आना ... २५ |
| ३—राजा सिन्धुका राज्याभिषेक (प्रसंग उत्पत्ति-प्रकरण सर्ग ५१) ... १७६ | ८—श्रीरामकी खिन्नताके सम्बन्धमें राजा दशरथका श्रीवसिष्ठसे प्रश्न ... २६ |
| ४—दोनों लीलाओंके साथ राजा पद्मका राज्याभिषेक (प्रसंग उत्पत्ति-प्रकरण सर्ग ५९) ... २८० | ९—मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रका राजा दशरथद्वारा ड्योढ़ीपर स्वागत ... २७ |
| ५—जनकका तमालकी झाड़ीमें छिपे सिद्धोंके गीत-श्रवण (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ८) ... ३३६ | १०—विश्वामित्रका रोष ... ३० |
| ६—क्षीरसागरमें शेषशय्यापर विराजित भगवान्का जगत्की स्थितिको देखना (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ३८) ... ४१६ | ११—विश्वामित्रको वसिष्ठका समझाना ... ३१ |
| ७—भगवान्के द्वारा प्रह्लादका अभिषेक (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ४१) ... ४८० | १२—श्रीरामके सेवकका राजसभामें आना ... ३२ |
| ८—शेषनागपर भगवान् विष्णु, स्वर्गमें इन्द्र और पातालमें प्रह्लाद (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ४२) ५४८ | १३—श्रीरामका पिता दशरथके चरणमें प्रणाम करना ... ३४ |
| ९—राजा बलि और शुक्राचार्य (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ४५-४६) ... ६१२ | १४—श्रीरामका अपने भाइयोंसहित पृथ्वीपर आसन ग्रहण करना ... ३४ |
| १०—गन्धर्वों और विद्याधरियोंके द्वारा भोगोंका प्रलोभन देनेपर भी उद्दालकका उनकी ओर ध्यान न देना (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ५४) ६८२ | १५—शरीरकी बाल्य, युवा और वृद्धावस्था ... ५६ |
| १६—विश्वामित्रका श्रीरामको तत्त्वज्ञान-सम्पन्न बताते हुए उनके सामने शुकदेवजीका वृत्तान्त उपस्थित करना ... ६५ | |
| रेखा-चित्र | १७—मेरुगिरिपर एकान्तमें बैठे शुकदेवको आत्मज्ञानी व्यासद्वारा उपदेश ... ६६ |
| १—वसिष्ठजीके द्वारा ज्ञानोपदेश ... १ | १८—राजा जनकके अन्तःपुरमें शुकदेवका युवतियोंके द्वारा सत्कार ... ६६ |
| २—अगस्तिद्वारा सुतीक्ष्ण ब्राह्मणसे मोक्षके कारणका प्रतिपादन ... १७ | १९—विश्वामित्रजीका वसिष्ठजीसे श्रीरामको उपदेश देनेका अनुरोध ... ६८ |
| ३—अग्निवेश्यका अपने उदास पुत्र कारुण्यको समझाना ... १८ | २०—अपने पिता ब्रह्माजीसे उत्पन्न होते ही वसिष्ठजीका अभिशप्त होना ... ७८ |
| ४—वाल्मीकिके आश्रमपर देवदूतके साथ राजा अरिष्टनेमिका आना और उनसे संसार-बन्धनके दुःखकी पीड़ासे छूटनेका उपाय पूछना ... २० | २१—ब्रह्माजीकी सनकादिको और नारदको भारतवर्षमें जाकर वहाँके निवासियोंका उद्धार करनेकी प्रेरणा ... ७९ |
| ५—मेरुपर्वतपर भरद्वाजकी लोक-पितामह ब्रह्मासे वर-याचना ... २१ | २२—वसिष्ठजीके द्वारा राजा पद्म और उनकी |