भारतकोश
संक्षिप्त योगवासिष्ठ

संक्षिप्त योगवासिष्ठ

Sankshipt Yoga Vasistha

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished750 पृष्ठ

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( १८ )

११३—अरिष्टनेमि, सुरुचि, कारुण्य तथा सुतीक्ष्णकी कृतकृत्यताका प्रकाशन, शिष्योंका गुरुजनोंके प्रति आत्मनिवेदन तथा ब्रह्मको एव ब्रह्मभूत वसिष्ठजीको नमस्कार ... ६९७१३—क्षमा प्रार्थना और नम्र निवेदन (हनुमानप्रसाद पोद्दार, चिम्मनलाल गोस्वामी) ... ६९९<br><br>१४—जीवन्मुक्तका स्वरूप और आचार (कविता) ... ७००
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चित्र-सूची

सादे
१—तीर्थयात्रासे लौटनेपर श्रीरामचन्द्रजीका स्वागत (प्रसंग वैराग्य-प्रकरण सर्ग ४) ... ४८६—राजा दशरथसे श्रीरामद्वारा तीर्थयात्राके लिये आज्ञा माँगना ... २४
२—सुरुचि और देवदूत (प्रसंग वैराग्य-प्रकरण सर्ग १) ... ११२७—तीर्थयात्रासे लौटे हुए श्रीरामका राजसभामें आना ... २५
३—राजा सिन्धुका राज्याभिषेक (प्रसंग उत्पत्ति-प्रकरण सर्ग ५१) ... १७६८—श्रीरामकी खिन्नताके सम्बन्धमें राजा दशरथका श्रीवसिष्ठसे प्रश्न ... २६
४—दोनों लीलाओंके साथ राजा पद्मका राज्याभिषेक (प्रसंग उत्पत्ति-प्रकरण सर्ग ५९) ... २८०९—मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रका राजा दशरथद्वारा ड्योढ़ीपर स्वागत ... २७
५—जनकका तमालकी झाड़ीमें छिपे सिद्धोंके गीत-श्रवण (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ८) ... ३३६१०—विश्वामित्रका रोष ... ३०
६—क्षीरसागरमें शेषशय्यापर विराजित भगवान्‌का जगत्‌की स्थितिको देखना (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ३८) ... ४१६११—विश्वामित्रको वसिष्ठका समझाना ... ३१
७—भगवान्‌के द्वारा प्रह्लादका अभिषेक (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ४१) ... ४८०१२—श्रीरामके सेवकका राजसभामें आना ... ३२
८—शेषनागपर भगवान् विष्णु, स्वर्गमें इन्द्र और पातालमें प्रह्लाद (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ४२) ५४८१३—श्रीरामका पिता दशरथके चरणमें प्रणाम करना ... ३४
९—राजा बलि और शुक्राचार्य (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ४५-४६) ... ६१२१४—श्रीरामका अपने भाइयोंसहित पृथ्वीपर आसन ग्रहण करना ... ३४
१०—गन्धर्वों और विद्याधरियोंके द्वारा भोगोंका प्रलोभन देनेपर भी उद्दालकका उनकी ओर ध्यान न देना (प्रसंग उपशम-प्रकरण सर्ग ५४) ६८२१५—शरीरकी बाल्य, युवा और वृद्धावस्था ... ५६
१६—विश्वामित्रका श्रीरामको तत्त्वज्ञान-सम्पन्न बताते हुए उनके सामने शुकदेवजीका वृत्तान्त उपस्थित करना ... ६५
रेखा-चित्र१७—मेरुगिरिपर एकान्तमें बैठे शुकदेवको आत्मज्ञानी व्यासद्वारा उपदेश ... ६६
१—वसिष्ठजीके द्वारा ज्ञानोपदेश ... १८—राजा जनकके अन्तःपुरमें शुकदेवका युवतियोंके द्वारा सत्कार ... ६६
२—अगस्तिद्वारा सुतीक्ष्ण ब्राह्मणसे मोक्षके कारणका प्रतिपादन ... १७१९—विश्वामित्रजीका वसिष्ठजीसे श्रीरामको उपदेश देनेका अनुरोध ... ६८
३—अग्निवेश्यका अपने उदास पुत्र कारुण्यको समझाना ... १८२०—अपने पिता ब्रह्माजीसे उत्पन्न होते ही वसिष्ठजीका अभिशप्त होना ... ७८
४—वाल्मीकिके आश्रमपर देवदूतके साथ राजा अरिष्टनेमिका आना और उनसे संसार-बन्धनके दुःखकी पीड़ासे छूटनेका उपाय पूछना ... २०२१—ब्रह्माजीकी सनकादिको और नारदको भारतवर्षमें जाकर वहाँके निवासियोंका उद्धार करनेकी प्रेरणा ... ७९
५—मेरुपर्वतपर भरद्वाजकी लोक-पितामह ब्रह्मासे वर-याचना ... २१२२—वसिष्ठजीके द्वारा राजा पद्म और उनकी