भारतकोश
संक्षिप्त योगवासिष्ठ

संक्षिप्त योगवासिष्ठ

Sankshipt Yoga Vasistha

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished750 पृष्ठ

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( १९ )

पत्नी लीलाका उपाख्यान-कथन ... ११५लीलाका सरस्वतीके साथ आक्रमणकारी राजा-द्वारा उपस्थित किया गया संग्राम-दृश्य देखना १३८
२३-रानी लीलाद्वारा विद्वान्, ज्ञानी और तपस्वी ब्राह्मणोंकी पूजाके पश्चात् उनसे अमरत्व-प्राप्तिका साधन पूछा जाना ... ११६४०-लीला और सरस्वतीका आकाशमें विमानपर स्थित होकर युद्धका अवलोकन करना ... १३९
२४-लीलाद्वारा सरस्वती देवीकी आराधना ... ११७४१-युद्धका बंद होना ... ... १४४
२५-अन्तःपुरमें मृतपतिके शवके सम्मुख वियोग-विह्वल रानी लीला .. .. ११८४२-राजा विदूरथके शयनागारमें गवाक्षरन्ध्रसे लीला और सरस्वतीका प्रवेश ... ... १४४
२६-सरस्वतीका आकाशवाणीके रूपमें पतिके शवको फूलसे ढकनेका लीलाको आदेश देना ११८४३-राजा पद्मके भवनमें सरस्वती और लीलाका प्रवेश और राजाद्वारा उनका पूजन ... १४६
२७-आधी रातके समय लीलाके आवाहनपर सरस्वतीका प्रकट होकर उसे दर्शन देना ... ११९४४-राजा पद्मका सरस्वतीसे अपने जीवनके अनेक वृत्तान्तोंके स्मरणका कारण पूछना ... १४७
२८-निर्विकल्प समाधिद्वारा रानी लीलाका राज प्रासादके आकाशमें सिंहासनारूढ़ राजा पद्मका देखा जाना ... ... ११९४५-राजा विदूरथद्वारा युद्धकी प्रलयाग्निमें भग्न नगरमें ग्रस्त प्राणियोंका करुणक्रन्दन श्रवण ... १५१
२९-आकाशस्वरूपा लीलाद्वारा समाधि-अवस्थामें आकाशरूपिणी राजसभामें पतिके वासनामय स्वरूप और राजवैभवका दर्शन ... १२०४६-लीला और सरस्वतीसे आदेश लेकर राजा विदूरथका युद्धके लिये प्रस्थान ... १५१
३०-लीलाका सरस्वतीसे कृत्रिम और अकृत्रिम सृष्टिके विषयमें पूछना और सरस्वतीद्वारा एक ब्राह्मण-दम्पतिके जीवन-वृत्तान्तका निरूपण ... १२१४७-द्वितीय लीलाकी सरस्वती देवीसे वर याचना .. १५३
३१-वसिष्ठनाम-धारी ब्राह्मणका पर्वतशिखरपर बैठकर एक राजाको सपरिवार शिकार खेलनेकी इच्छासे जाते देखकर विचारमग्न होना .. ... १२३४८-युद्धस्थलमें पराजित राजा विदूरथके गलेपर राजा सिन्धुका अस्त्रप्रहार और विदूरथका रथसहित राजप्रासादमें प्रवेश ... ... १५८
३२-वसिष्ठ नामधारी ब्राह्मणकी पत्नी अरुन्धती-की सरस्वती-आराधना और पतिके अमरत्व-सम्बन्धी वरकी प्राप्ति ... ... १२३४९-लीलाका अपने वासनामय शरीरसे पति पद्मसे मिलनेके लिये आकाशमार्गसे ऊपर जाना और मार्गमें सरस्वतीद्वारा प्रेषित अपनी कन्यासे मिलना ... ... १६१
३३-वसिष्ठनामधारी ब्राह्मणकी त्रिलोकविजयी नरेश-पदकी प्राप्ति ... ... १२४५०-लीलाका अपने मृतपति पद्मका मुख देखना और अपनी प्रतिमाके प्रभावसे इस सत्यको समझना कि संग्राममें राजा सिन्धुद्वारा मारे गये ये मेरे पति ही हैं ... ... १६२
३४-रानी लीला और सरस्वतीका संवाद ... १२४५१-संकल्परूपिणी देवियाँ लीला और सरस्वतीका जीवात्माके साथ राजा पद्मके नगरमें प्रवेश ... १६८
३५-सत्यकाम और सत्यसंकल्पसे युक्त लीला और सरस्वती देवीका ज्येष्ठशर्मा आदिको साधारण स्त्रीके रूपमें दर्शन ... ... १३२५२-लीला और सरस्वतीद्वारा शवमण्डपमें राजा विदूरथकी शवशय्याके पार्श्वभागमें स्थित लीलाका देखा जाना जो पहले मृत्युको प्राप्त हो चुकी थी और पहले ही वहाँ आ गयी थी .. १६९
३६-लीला और सरस्वतीका आकाशमें भ्रमण ... १३३५३-राजा पद्मकी सरस्वतीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति ... १७३
३७-लीलाका सरस्वतीसे अपने पूर्वजन्मके वृत्तान्तका निरूपण ... ... १३४५४-वाल्मीकि और भरद्वाज ... ... २४९
३८-लीलाका गृहमण्डपमें प्रवेश कर सरस्वतीके साथ आकाशमें उड़ जाना .. ... १३५५५-राजा दशरथका मुनिसमुदायका सत्कारकर उनसे विदा लेना ... ... २५०
३९-जम्बूद्वीपमें भारतवर्षमें अपने पतिके राज्यमें