भारतकोश
संक्षिप्त योगवासिष्ठ

संक्षिप्त योगवासिष्ठ

Sankshipt Yoga Vasistha

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished750 पृष्ठ

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( २१ )

वायसराज भुशुण्डकी कथाका वृत्तान्त-वर्णन··· ३७६दिनोंतक खोज करनेवाले किरातको चिन्तामणिकी प्राप्ति ··· ४४९
९४-वसिष्ठजीका भुशुण्डके निवास-स्थान मेरुगिरिपर जाना ··· ३७७११५-राजा शिखिध्वजकी बढ़ती वैराग्य-वृत्ति ··· ४५०
९५-वसिष्ठजी और भुशुण्डका संवाद—कुल-आयु आदिके सम्बन्धमें ··· ३७८११६-राजा शिखिध्वजका चूडालासे अपने वैराग्य-कथन ··· ४५१
९६-वसिष्ठजीके सम्मुख भुशुण्डद्वारा महादेवजीके रूप और मातृकाओंका वर्णन ··· ३७९११७-राजा शिखिध्वजका गृह-त्याग·· ··· ४५२
९७-मातृकाओंके महोत्सवमें ब्राह्मी देवीके रथमें जुतनेवाली हंसियों और अम्बुजादेवीके वाहन चण्ड नामक कौएका नृत्य ··· ··· ३८०११८-चूडालाका आकाश-मार्गसे उड़कर अपने पतिका अन्वेषण ··· ४५४
९८-समाधिसे विरत होनेपर ब्राह्मीदेवीकी अपनी माता हंसियोंके साथ भुशुण्ड आदिद्वारा आराधना ··· ३८०११९-ब्राह्मणकुमारके रूपमें चूडालाका शिखिध्वजद्वारा पूजन-सत्कार ··· ··· ४५५
९९-वसिष्ठजीसे भुशुण्डका मेरुपर्वतपर कल्पवृक्षकी शाखामें स्थित अपने घोसलेका वर्णन करना··· ३८११२०-राजा शिखिध्वजकी देवपुत्रके वेषमें चूडालासे बातचीत ··· ··· ४५७
१००-भुशुण्डद्वारा वसिष्ठका पूजन और आकाश-मार्गसे गमन ··· ३९११२१-कुम्भ ( चूडाला ) की बात सुनकर सर्वस्व-त्यागके लिये उद्यत शिखिध्वज ··· ४६५
१०१-कैलास पर्वतपर गङ्गातटस्थ आश्रममें तप करते हुए वसिष्ठजीको पार्वतीजीसहित भगवान् महादेवजीका दर्शन ··· ··· ३९६१२२-कुम्भ ( चूडाला ) के अन्तर्हित हो जानेपर राजा शिखिध्वजका विचार ··· ··· ४७७
१०२-वसिष्ठजीद्वारा भगवान् नीलकण्ठ शंकरको पुष्पाञ्जलि-समर्पण ··· ··· ४०९१२३-कुम्भके वेषमें चूडालाका वनस्थलीमें उतरकर निर्विकल्प समाधिमें स्थित राजा शिखिध्वजको देखना ··· ··· ४७८
१०३-वेताल और राजाका संवाद ··· ४३११२४-राजा शिखिध्वजद्वारा कुम्भको पुष्पाञ्जलि-समर्पण ··· ··· ४७९
१०४-अपने गुरु त्रितलके साथ राजा भगीरथकी बातचीत ··· ४३४१२५-महेन्द्रपर्वतपर अग्निके साक्ष्यमें मदनिका ( चूडाला ) और शिखिध्वजका विवाह ··· ४८४
१०५-राजा भगीरथका सर्वस्व-त्याग··· ··· ४३५१२६-चूडालाद्वारा शिखिध्वजकी परीक्षाके हेतु अपनी मायाके बलसे वनस्थलीमें देवगणों और अप्सराओंके साथ पधारे हुए इन्द्रको उन्हें दिखलाना और राजा शिखिध्वजद्वारा देवराजकी विधिवत् पूजा ··· ··· ४८५
१०६-राजा भगीरथका अपने ही नगरमें भिक्षाटन··· ४३६१२७-चूडालाका मदनिका वेषमेंमे ही अपने असली रूपमें प्राकट्य और राजा शिखिध्वजका आश्चर्यचकित होना ··· ··· ४८७
१०७-राजा भगीरथका अन्य देशमें विद्यमान उत्तम नगरमें राज्याभिषेक ··· ··· ४३६१२८-अपनी पत्नी चूडालाको देखकर राजा शिखिध्वजका प्रसन्न होना ··· ··· ४८८
१०८-भूतलपर गङ्गाजीको लानेके लिये राजा भगीरथकी तपस्या ··· ··· ४३७१२९-चूडालासहित शिखिध्वजका अपने नगरमें प्रवेश और स्वागत ··· ··· ४९१
१०९-राजा शिखिध्वज और चूडालाका विवाह ··· ४३८१३०-कचका अपने पिता वृहस्पतिसे जीवन्मुक्तिके विषयमें प्रश्न करना ··· ··· ४९३
११०-राजा शिखिध्वजद्वारा चूडालाके रूप-सौन्दर्य-की प्रशंसा ··· ··· ४४११३१-वसिष्ठजीद्वारा मूढ़बुद्धि आत्मज्ञानशून्य
१११-चूडालाकी खिन्नता ··· ··· ४४२
११२-चूडालाका एकान्तमें योगाभ्यास ··· ४४३
११३-चूडालाकी योगसिद्धि ··· ··· ४४८
११४-विन्ध्याचलके जगली प्रदेशमें एक कौड़ीकी तीन