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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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१२६ संस्कारविधिः इस समय बहुधा नहीं मिलते, तीन वर्ष में पढ़ें और पढ़ावें। पुनः सामवेद का उपवेद गान्धर्ववेद, जिसमें नारदसंहितादि ग्रन्थ हैं, उन्हें पढ़के स्वर, राग, रागिणी, समय, वादित्र, ग्राम, ताल, मूर्च्छना आदि का अभ्यास यथावत् तीन वर्ष के भीतर करें। तत्पश्चात् अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद, जिसको शिल्पशास्त्र कहते हैं, जिसमें विश्वकर्मा, त्वष्टा और मयकृत संहिता-ग्रन्थ हैं, उनको छह वर्ष के भीतर पढ़के विमान, तार, भूगर्भादि विद्याओं का साक्षात् करें। शिक्षा से लेके आयुर्वेद तक इन १४ चौदह विद्याओं को ३१ इकतीस वर्षों में पढ़के, महाविद्वान् होकर अपने और सब जगत् के कल्याण और उन्नति करने में सदा प्रयत्न किया करें॥ ॥ इति वेदारम्भसंस्कारविधिः समाप्तः ॥