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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 318 में से

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पृष्ठ 267

संन्यासप्रकरणम् २६३ भुवनस्य पतये स्वाहा। अधिपतये स्वाहा। प्रजापतये स्वाहा। —यजुः० अ० २२। मं० ३२ ओम् आयुर्यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। प्राणो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। अपानो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। व्यानो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। उदानो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। समानो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। चक्षुर्यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। वाग्यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। मनो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। आत्मा यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। ब्रह्मा यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। ज्योतिर्यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। स्वर्यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। पृष्ठं यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। यज्ञो यज्ञेन कल्पताथ्ँ स्वाहा। —यजुः० अ० २२। मं० ३३ एकस्मै स्वाहा। द्वाभ्यां स्वाहा। शताय स्वाहा। एकशताय स्वाहा। व्युष्ट्यै स्वाहा। स्वर्गाय स्वाहा। —यजुः० अ० २२। मं० ३४ इन मन्त्रों से एक-एक करके ४३ स्थालीपाक की आज्याहुति देके पुनः पृष्ठ ३३ में लिखे प्रमाणे व्याहृति आहुति चार देकर, पृष्ठ ३६-३७ में लिखे प्रमाणे सामगान करके सब इष्ट-मित्रों से मिल, पुत्रादिकों पर सब घर का भार धरके, अग्निहोत्र की सामग्रीसहित जङ्गल में जाकर एकान्त में निवास कर योगाभ्यास, शास्त्रों का विचार, महात्माओं का संग करके स्वात्मा और परमात्मा को साक्षात् करने में प्रयत्न किया करे॥ ॥ इति वानप्रस्थसंस्कारविधिः समाप्तः ॥

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक) · पृष्ठ 267, कुल 318 में से · BharatKosha